अकेला है इंसान
अकेला है इंसान
अकेला है इंसान
इंसान अकेला ही आता है और अकेला ही जाता है
इंसान जिंदगी भर अकेले ही परिश्रम करता है
इंसान अकेले ही सब मुश्किलों का सामना करता है
जिंदगी भर इंसान भागता रेहता है
दौड़ दौड़ के थक जाता है गिरता है फिर संभलता है
अपने परिवार के लिए परिश्रम भी करता है
इंसान अकेले ही मुश्किलों से जूझता है
मगर अंत में जिंदगी अपनी हार जाता है
और कर देता है अलविदा इस संसार को चला जाता है
अकेले एक नई दुनिया में एक नई कहानी लिखे ने फिर से अकेले
