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chandraprabha kumar

Inspirational

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chandraprabha kumar

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अज्ञान भंजन

अज्ञान भंजन

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योगी की ऑंखों में धधक रही होती है भट्टी 

वैराग्य की भट्टी ,वहाँ नहीं झांकें ,

उनके पैरों की ओर देखें

ज्ञानांजन शलाका से आंखें खोलता है योगी।


मॉं ने कहा मेरे अज्ञान का भंजन कर

देवहूति ने अपने बेटे कपिल से कहा ,

मेरा अंतर तिमिर मिटा सद्गुरु 

जोत से जोत जगा ।


अंधकार की परतों को 

ज्ञान चीर देता है,

शब्दों में प्रकाश रहता है 

ज्ञान से समाधान होता है ।


ज्ञान से शांति मिलती है 

गुरु के ज्ञान की गुदड़ी खुल गई,

ज्ञान की वर्षा होने लगी 

ज्ञान प्रकाश की वर्षा से मॉं भीग गई।


एक पल में ही मॉं प्रकाशित हो गईं

करुणा संपन्न तितिक्षु अजात शत्रु,

सच्चे महापुरुषों का संग कीजिए

सत्संग से निश्चल तत्त्व आता है।


सत्संग करोगे तो स्वाध्याय का मन करेगा

परमार्थ ही कुंजी सत्संग में है 

जहाँ निरंतर सत्संग होता है 

वहाँ कल्पवृक्ष व कामधेनु प्रकट हो जाते हैं। 


देवता प्रसन्न होने लगते हैं 

प्रतिकूल परिस्थितियों में खड़े होने की

योग्यता सत्संग दे देता है

मति गति भूति भलाई सत्संग देता है।


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