STORYMIRROR

Usha Bhatia

Inspirational

4  

Usha Bhatia

Inspirational

नव संवत्सर

नव संवत्सर

1 min
249

सूरज की पहली किरण के संग,

फिर होगा कल नव संवत्सर का आगमन।

प्रकृति की निर्बाध गति, यात्रा है उसकी अनन्त।


न बयार थमी, ना ही ज़मीं।

बरसों बरस धरा शीतल हुई,

सावन की घटा कभी थकी नहीं।


हे प्राणी, नववर्ष का तू भी आगाज़ कर।

जी ले ज़िन्दगी का हर इक पल।

थमें नहीं कभी तेरे कदम,

निरंतरता हो तेरा मकसद।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational