Nirali Thanki
Tragedy Inspirational
प्यार बनकर तूने मुस्कुराना सिखाया
दर्द बनकर तूने संभलना सिखाया
इम्तेहान लेकर तूने लड़ना सिखाया
कभी प्यार बनकर
तो कभी दर्द बनकर
ऐसे ही गुज़र रही है ज़िन्दगी
हमसफ़र बनकर।
ये जिंदगी
चाहत
साथ तुम्हारे ...
ऐसे ही गुज़र र...
तुमने सब कुछ खोकर मुझे पाया था और आज मैंने सब कुछ पाकर भी तुम्हें खो दिया। तुमने सब कुछ खोकर मुझे पाया था और आज मैंने सब कुछ पाकर भी तुम्हें खो दिया।
आज कहना चाहती हूं, बात कुछ अपनी जुबाँ से! आज कहना चाहती हूं, बात कुछ अपनी जुबाँ से!
जब जब तार तार हुई मानवता, बस सिसकी,बोल नही पाई मैं। जब जब तार तार हुई मानवता, बस सिसकी,बोल नही पाई मैं।
मैं वो लड़की हूं जिस पर दरिंदगी के नित नये इतिहास रचे जाते हैं मैं वो लड़की हूं जिस पर दरिंदगी के नित नये इतिहास रचे जाते हैं
अफसोस है, सपने देखे सिर्फ, ना सत्य बने। अफसोस है, सपने देखे सिर्फ, ना सत्य बने।
इस मतलबी, भागती दुनिया में रिश्ता भी अब डिजिटल होकर रह गया। इस मतलबी, भागती दुनिया में रिश्ता भी अब डिजिटल होकर रह गया।
प्रलय की जब जग में बारी आई, जल बिन जग में हाहाकार हुआ प्रलय की जब जग में बारी आई, जल बिन जग में हाहाकार हुआ
सरस्वती का सदा स्नेह है इन पर तभी बच्चों को संस्कार सिखाती! सरस्वती का सदा स्नेह है इन पर तभी बच्चों को संस्कार सिखाती!
बूढ़े मां बाप को मिल गया फिर जीने का जरिया, हम लोगों को भी इनकी पीड़ा से अवगत किया। बूढ़े मां बाप को मिल गया फिर जीने का जरिया, हम लोगों को भी इनकी पीड़ा से अवगत...
क्यूं चेहरे पर एक चेहरा है, चीख के सच कह रहा है! क्यूं चेहरे पर एक चेहरा है, चीख के सच कह रहा है!
खुशियों की बौछार वो तसव्वूर अलग हैं आँसूओ में नहाना रोज की बात हैं। खुशियों की बौछार वो तसव्वूर अलग हैं आँसूओ में नहाना रोज की बात हैं।
सत्ता एक आदिम इच्छा है। सत्ता एक आदिम इच्छा है।
देखा हालात आजाद भारत का इक छोटे से पल के दृश्य में । देखा हालात आजाद भारत का इक छोटे से पल के दृश्य में ।
मेरी तरह तुम भी एक कदम उठाना हो सकता है दिन बदलाव जरूर आए ! मेरी तरह तुम भी एक कदम उठाना हो सकता है दिन बदलाव जरूर आए !
कहीं राजभवन को जगमग करता, किसी चिराग़ से कम तो नहीं। कहीं राजभवन को जगमग करता, किसी चिराग़ से कम तो नहीं।
लेकिन अब सड़क अपनी, गांव पराया लगता हैl लेकिन अब सड़क अपनी, गांव पराया लगता हैl
तुम्हारी गढ़ी छवि को अपने व्यक्तिव से, आहूति देने अंतत: तुमसे विदा होने। तुम्हारी गढ़ी छवि को अपने व्यक्तिव से, आहूति देने अंतत: तुमसे विदा होने।
क्यों मथने आ जाता है अपवित्रता का बीजगणित रजस्वला होने के क्षणों में? क्यों मथने आ जाता है अपवित्रता का बीजगणित रजस्वला होने के क्षणों में?
हाँ....बेटियों, ये हुनर माँ के पेट से ही सीखकर आती हैं। हाँ....बेटियों, ये हुनर माँ के पेट से ही सीखकर आती हैं।
देश चल रहा नफरत से ही, फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा । देश चल रहा नफरत से ही, फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा ।