Nirali Thanki
Tragedy Inspirational
प्यार बनकर तूने मुस्कुराना सिखाया
दर्द बनकर तूने संभलना सिखाया
इम्तेहान लेकर तूने लड़ना सिखाया
कभी प्यार बनकर
तो कभी दर्द बनकर
ऐसे ही गुज़र रही है ज़िन्दगी
हमसफ़र बनकर।
ये जिंदगी
चाहत
साथ तुम्हारे ...
ऐसे ही गुज़र र...
मैं दिल से मजबूर हूँ अपने और वो दुनियादारी से। मैं दिल से मजबूर हूँ अपने और वो दुनियादारी से।
अब आयी चुनाव की भूख है, युवा बना बेवकूफ है। धर्म को मुद्दा हम बनाएंगे, युवाओं का वोट अब आयी चुनाव की भूख है, युवा बना बेवकूफ है। धर्म को मुद्दा हम बनाएंगे, ...
तमस की गुहा में क्यों, स्त्रियाँ अब जल रहीं। तमस की गुहा में क्यों, स्त्रियाँ अब जल रहीं।
कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था। कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था।
अजी नौकरी का भी अपना मज़ा है। जहां अपनी चलती नही कुछ रज़ा है। अजी नौकरी का भी अपना मज़ा है। जहां अपनी चलती नही कुछ रज़ा है।
अथाह स्वेद बहाती है। अपनी जठराग्नि बुझाती है।। अथाह स्वेद बहाती है। अपनी जठराग्नि बुझाती है।।
मुलजिम हो तुम अपने ही तबके की उन तमाम नवजातों की. मुलजिम हो तुम अपने ही तबके की उन तमाम नवजातों की.
बिखर रहा है किसी नीड़ सा, तिनके- तिनके प्यार । बिखर रहा है किसी नीड़ सा, तिनके- तिनके प्यार ।
सन्नाटों की शाम हमारी बस्ती में । लोकतंत्र बदनाम हमारी बस्ती में ।। सन्नाटों की शाम हमारी बस्ती में । लोकतंत्र बदनाम हमारी बस्ती में ।।
दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर। दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर।
चीखती नदी मौन प्रार्थना में लीन हो जाती है। चीखती नदी मौन प्रार्थना में लीन हो जाती है।
राजनीति के खेल में क्या हार क्या जीत ; ना कोई शत्रु यहां और ना यहां कोई मीत ! राजनीति के खेल में क्या हार क्या जीत ; ना कोई शत्रु यहां और ना यहां कोई मीत !
नौकरी कर घर लौटती औरत बेहद थकी होती है. नौकरी कर घर लौटती औरत बेहद थकी होती है.
मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है
इक दुबला पतला सा पेड़ था, चंद टहनियां चंद पत्ते थे। इक दुबला पतला सा पेड़ था, चंद टहनियां चंद पत्ते थे।
कहने लगा, "फर्ज़ अदा करने की सज़ा मिली है एक बाप को।" कहने लगा, "फर्ज़ अदा करने की सज़ा मिली है एक बाप को।"
जीवन से बड़ी प्रयोगशाला इस दुनिया में और कोई नहीं है। जीवन से बड़ी प्रयोगशाला इस दुनिया में और कोई नहीं है।
है कितना क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं। है कितना क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं।
राजनीति के दलदल में, घुटने टेक रही है गौ माता। राजनीति के दलदल में, घुटने टेक रही है गौ माता।
धरती ऐसे जल रही, जैसे जले मशाल। धूल-धूल रस्ते हुए, सूखे-सूखे ताल। धरती ऐसे जल रही, जैसे जले मशाल। धूल-धूल रस्ते हुए, सूखे-सूखे ताल।