STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Abstract

4  

Kanchan Prabha

Abstract

ऐसा मेरा गाँव

ऐसा मेरा गाँव

1 min
705

सर्वगुण सम्पन्न अभिलाषा

आदर्श गाँव की परिभाषा

किसानों की नगरी है

नार भरती गगरी है


पीले पीले सरसों के खेत

कहीं नदी तो सपनीले रेत

ज्ञान बांटते विद्यालय हो

घर घर बना शौचालय हो


रंग बिरंगे फूल खिले हो

कल कल कर नदियाँ हो बहती

छम छम कर सखियाँ हो हँसती

पेड़ों के झुरमुट में छुप कर


बच्चे खेले टहनी पर चढ़ कर

सुर्य की नई छटा नारंगी

बैजू बैठा लिये सारंगी

पँछी गाते गीत सुरीले


चूल्हों पर चढ़ गये पतीले

भोर भये नीपे घर आँगन

सजे नार मुस्काये साजन

होते ऐसे गाँव अलबेले

लगते रोज अनोखे मेले।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract