आसमान के धरती पर
आसमान के धरती पर
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एक रात चुप से मैने खुद को
आसमां में भर्ती कर
और खड़ी हो गई मुस्काते
आसमान के धरती पर
आसमान के नीले नीले रंग
बड़े मनमोहक थे
कवियों के मन की रचनाओं के
छंद कभी कभी दोहक थे
उड़ते पंछी आसमान में
लगते कितने सुन्दर थे
जैसे कई कई बच्चे दौड़ते
अपने घर के अंदर थे
उमड़ घुमड़ करते थे बादल
काली घटा मतवाली थी
हरे गुलाबी रंग बिरंगे
फूलों की भी क्यारी थी
भला कौन करता था खेती
आसमां के मैदानों पर
ख़्वाब हकीक़त दिखता मुझ को
अपने मन की आँखो पर
