STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Comedy

4  

Sudhir Srivastava

Comedy

ऐसा कानून बना दो

ऐसा कानून बना दो

1 min
246

मैं बहुत मगरुर हूं

अपने घमंड में चूर हूं

नहीं किसी की फ़िक्र मुझे है

मैं दिमाग से बहुत दूर हूं।

जब मैं ही खुद को समझ न पाता


जाने क्या क्या मैं बक जाता

चर्चा में मैं बना रहूं

बस विवाद से अपना नाता।

चाहे जितना दोष लगाओ

चाहे जितना सब मिल समझाओ

मैं पप्पू हूं पप्पू ही रहूंगा

किसी की दया पर नहीं जिऊँगा।


सत्ता का न मोह मुझे है,

खुद की भी परवाह नहीं है

चाहे मेरा पद ले लो

या चाहो तो जेल भेज दो।


मुझको फर्क न पड़ने वाला

बड़ा लापरवाह हूं यही समझ लो

चाहे जितने आरोप लगा लो

पर मेरा अरमान समझ लो।


सारे हथकंडे अपना चुका हूं

उछलकूद कर हार चुका हूं

मेरे हित की खातिर अब

सब मिलकर संन्यास दिला दो


मेरा भी उद्धार करा दो

मेरा बेड़ा पार करा दो

इतनी दया करो मुझ पर

मेरी चर्चा बंद करा दो।


बहुत हो चुका लुका छिपी

अब तो मेरी विनती सुन लो

तुम अपना कर्तव्य निभा दो

राजनीति से दूर करा दो।


अपने हित की सोच सकूं

इतनी फुर्सत मुझे दिला दो,

एक अदद कंठी माला पहना दो

भगवा परिधान में मुझे सजा दो।


पूजा पाठ जप तप का प्रबंध करा दो

मेरा भी जीवन धन्य बना दो

मुझे राम की शरण मिल सके

बस ! ऐसा कानून बना दो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy