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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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ऐसा होता मेरा हमसफर

ऐसा होता मेरा हमसफर

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यह जानते हुए की मुझमें बहुत सारी कमियां है,

फिर भी मुझे मेरी कमियों के साथ अपनाए

ऐसा होता मेरा हमसफर।।

जो मेरी सादगी और नाराजगी को बहुत अच्छे से समझ जाए,

अपना गुस्सा कभी मुझे दिखा ना पाए ,

ऐसा होता मेरा हमसफर।।

कभी दिल की धड़कन बनकर सांसों की डोर से जुड़ जाता,

कभी प्रणय का आधार बनकर अपनेपन का एहसास दिलाता,

ऐसा होता मेरा हमसफर।

कभी आंखों में चुपके से आकर ज्योति बनकर चमकता,

कभी होंठों की मुस्कान बनकर मेरे चेहरे का नूर बढ़ाता,

ऐसा होता मेरा हमसफर।

कभी उषा की लालिमा बनकर मुझे भोर का सिंदूर लगाता,

कभी सूरज की किरण बनकर आशा के दीप जलाता,

ऐसा होता मेरा हमसफर।

सुख और दुःख के एहसासों को बाटता, 

व्यस्तता जीवन में मेरे थोड़ी खुशियों से राहत के पल ले कर आता,

ऐसा होता मेरा हमसफर।

कभी दीवाना बादल बनकर प्यार की बूंदों से रूह भिगोता,

कभी लहराता दरख़्त बनकर खुशियों की बहार से रिझाता,

ऐसा होता मेरा हमसफर।

कभी वो गजल के अल्फाज बनकर कागज़ पे उतर जाता,

तो कभी जिंदगी का साज बनकर दिल की आवाज बन जाता,

ऐसा होता मेरा हमसफर।

वो मेरी मन्नतों और आशाओं को पूरा करने में मेरा साथ देता,

मैं जैसी हूं और जैसी भावना और कामना है मेरी उसी के साथ मुझे खुश रखने की कोशिश करता,

ऐसा होता मेरा हमसफर।

हमारे बीच हजारों दूरियां हो पर फिर भी उसका मन हमेशा मेरे करीब होता,

मैं उसकी होती और वो केवल मेरा होता,

ऐसा होता मेरा हमसफर।


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