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Mayank Kumar 'Singh'

Romance


5.0  

Mayank Kumar 'Singh'

Romance


अदालत

अदालत

1 min 304 1 min 304

जिंदगी एक अदालत हो गई 

मोहब्बत फिर गुनाह हो गई 

मिले आंगन अपने दिल की 

बाग दिल फूलों के बेरुखी की

" क़यामत " हो गई ...

सब काबिल थे "वकील "खुद की

 तब भी "काबिलियत" जीवन की

 मोहताज हो गई...!

 शहद थी प्रियसी दिल की

 शहर में आते जहर हो गई 

हवा भी क्या मुखोटे पहनते हैं ?

 गांव सी दिल में कुछ

 शहर के दिल में कुछ 

और होते हैं !!

सांसों की मिजाज तो यही कहते हैं ,

शुरुआत में मोहब्बत गांव होती है

शहर में आते इस में मिलावट होती है !


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