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Satyendra Gupta

Abstract

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Satyendra Gupta

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अबूझ पहेली

अबूझ पहेली

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लोग आते है जाने के लिए

मुठ्ठी बंद होती है खुल जाने के लिए

जन्म लेते है मर जाने के लिए

लोग सोते है जाग जाने के लिए

ये जीवन की अबूझ पहेली है

जो समझ गया वो हीरा

जो ना समझा वो जीरो।


लेकिन ये आना और जाना

मुठ्ठी का बंद होना और खुलना

जन्म लेना और मर जाना

सोना और जाग जाना 

नहीं पता और जान भी जाना

ये जीवन की अबूझ पहेली है

जो समझ गया वो हीरो

जो ना समझा वो जीरो।


लोग जो आते है एक दिन चले जाते है

अपनी अच्छी और बुरी कहानी छोड़ जाते है

साथी अच्छे और बुरे दोनों को मिलते है

किसी को फूल तो किसी को शूल मिलते है

किसी को अमीरी तो किसी को गरीबी मिलते है

ये जीवन की अबूझ पहेली है

जो समझ गया वो हीरो

जो ना समझा वो जीरो ।


जन्म और मृत्यु का अंदाज निराला है

कोई अमीरी में जन्म लेकर गरीबी में मरता है

कोई गरीबी में जन्म लेकर अमीरी में मरता है

कोई जीने के लिए संघर्ष करता है

तो कोई मरने के लिए संघर्ष करता है

कोई जीना ही नही चाहता है

तो कोई मरना ही नही चाहता है

ये जीवन की अबूझ पहेली है

जो समझ गया वो हीरो

जो ना समझा वो जीरो।


सोना और जागना गजब का मेल है

बिना सोए रह नही सकते

बिना जागे कुछ कर नही सकते

जीवन की आधी उम्र सो कर

थोड़ी उम्र सोच कर

लोग कहते है आंखों में नींद नहीं है

क्युकी सपनो में उड़ान नही है


मंजिल वहीं पाते है जो

सपनों में भी उड़ते है

और जाग जाने के बाद भी उड़ते है

ये जीवन की अबूझ पहेली है

जो समझ गया वो हीरो

जो ना समझा वो जीरो।


हर किसी की अपनी कहानी होती है

सफल इंसान की छप जाती है

और असफल इंसान की ढप जाती है

जीना भी सभी को है, मरना भी सभी को है

हसना भी सभी को है, रोना भी सभी को है

जीवन में सोचो मत ज्यादा

बस रखो पक्का इरादा

वैसे भी है तो एक दिन मरना



तो किस बात से है डरना

डर को निकाल देना है

मरने से पहले सभी के दिलो में,

 एक छाप छोड़ देना है

ये जीवन की अबूझ पहेली है

जो समझ गया वो हीरो

जो ना समझा वो जीरो।


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