अबॉर्शन
अबॉर्शन
क्यों मुझे जन्म से पहले ही
मार दिया जाता है।
मेरी क्या गलती
हो जाती है।
किस पाप की सज़ा मुझे मिलती है
मुझ अजन्मी
से क्या जरा भी
मोह नही होता
जिसे आँख खोलने से
पहले ही सदा के
लिए सुलाया जाता है
क्या दुनिया में
आने का अधिकार
मुझे नही?
मासूम आंखों से
मैं क्यों नही
देख सकती
सँसार?
माँ क्या तुम्हें भी
मेरे होने का एहसास
नही होता
तुम भी निर्दयी
क्यों हो जाती हो
बेटी के लिए
माँ की कोख
क्यों हत्यारिन
बन जाती है।
मैं तो तुम्हारा ही
अंश रहती हूँ
क्यों अपने
अंश से मुख
मोड़ लेती होक्या गलती है मेरी
यही न
कि
मैं लड़की हूँअरे माँ
क्यों भूल जाती हो
तुम भी किसी की
बेटी हो।
मैं भी दुनिया में
आना चाहती हूँ
मैं भी तेरी बेटी
कहलाना चाहती हूँ
भाई की कलाई
पर मेरे बिना
कौन राखी
बांधेगा।
पुरुष की प्रिया
कौन बनेगा
जब रूप नही
लेती तेरी कोख में
तीन महीने तक
तू मुझपे
जान न्यौछावर
करती है।
रुप लेती ही
मुझमें ऐसी क्या
बुराई आ जाती
है कि सबकी
नफरत आ जाती
है मेरे प्रति।
मैं भी
तेरी ही हूँ
तुझसे ही हूँ
क्या तेरा अंश बदल
जाता है
तेरा ही अभिमान हूँ
तेरा ही प्यार हूँ
विश्वास रख
तेरा अभिमान
बनके रहूंगी सदा
दुनिया में मुझे आने तो
दो माँ।
मुझे मत मारो
कोख में
मत मारो।
