STORYMIRROR

Akshat Garhwal

Inspirational

4  

Akshat Garhwal

Inspirational

अभी बाकी है

अभी बाकी है

1 min
442

उन अर्ध चांदनी रातों की याद,

बातें अभी भी आती हैं

जिनकी जाने कागज़ के

कुछ पन्नों से छिन जाती है।


उन पन्नों से ना डरा करो

यह जिंदगी अब भी साखी है

ना गली-गाँव ना शहर-डगर

अभी पूरी दुनिया बाकी है।


अख़बार इश्तेहारों में रोज़

एक खबर नजर आ जाती है

कोरे इंतहानों से ना जाने

कितनी जाने जाती हैं।


विद्या के अर्थी हो तुम यह

ज्ञान तुम्हारा साथी है

इतनी भी जल्दी क्या हारे

अभी पढ़ना लिखना बाकी है।


क्यों प्राण छोड़ देते हो जबकि

मुश्किल सबको आती है

हार से ना तुम डरा करो

यह सब जीवन की साथी हैं।


करो निराश ना मन को तुम

क्यों आस तुम्हारी जाती है

जय-पराजय करो ना तुम

अभी कोशिश करना बाकी है।


जो मात पिता की आस जुड़ी

पूरी तुम से ही होती है

ना कुछ प्यारा-प्रिय तुम से

उनको जब बात तुम्हारी होती है।


याद रखो इस बात को यारों

हिम्मत इससे आती है

उम्मीद को मारा करो ना तुम

अभी संघर्ष तुम्हारा बाकी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational