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Akshat Garhwal

Others

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Akshat Garhwal

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फटी तुम्हारी जेब है।

फटी तुम्हारी जेब है।

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लूटा ना जाने किस-किस को

कैसे यह एक एक कौड़ी कमाई है,

लौटा दे यह लालच का पैसा

इसी में तेरी भलाई है।


तुम्हारी नादानियां देख

इस बात का मुझको खेद है,

कितना भी संभाल लो अपना पैसा

क्योंकि फटी तुम्हारी जेब है।


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