अब तलवार उठानी है
अब तलवार उठानी है
भूल जाओ अब वो दिन जब
बिटिया को रोटी गोल सिखाते
अब बेटी को सिखाओ आत्मरक्षा की बातें
बेटी तू ना कोमल है न तू है कमजोर
उठा सकती परिवार का बोझ
तोड़ सकती तू भी शमशीर का छोर
कराटे युद्ध तुझे सीखना है
देना है उस राक्षस का जवाब
जो नोच लेता तुझे समझ हांडमांस का कबाब
ना कहलायेगी अब तू अबला नारी
न अपना को कहलाना माता रानी
है तू भी एक इंसान जग की पालनहारी
सीखना है रणकौशल तुझको
करना है माँ बाप का ऊँचा सर
राह में न नीचे देख रखना ऊपर मस्तक को
भेड़िए तुझे मिलेंगे हर रास्ते पर
आये अगर कोई तेरे क़रीब
करना प्रहार उसके घिनोने कृत्य पर!
