आवाज़ जाती है...
आवाज़ जाती है...
आपसी तल्खियां बहुत बाद जाती है (कटुता )
शहरी पुरानी बस्तियाँ आबाद जाती है।
उस आसमां तक मेरी फरियाद जाती है
जहाँ मैं नहीं जाता वहाँ मेरी याद जाती है।
अपने दरमियाँ के रिश्तों में अगाध जाती है(गहराई )
वरना बदलते मौसम में सराद जाती है। (पतझड़ )
मेरी चीख़ से सटकर मेरी आवाज़ जाती है
मेरी तन्हाइयों में अकसर संवाद जाती है।
हर कहानी का कहीं आगाज़ जाती है
'उड़ता'तेरी शायरी में अल्फाज़ जाती है।
