STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Tragedy

4  

Sudhir Srivastava

Tragedy

आस्तीन का सांप

आस्तीन का सांप

2 mins
4

व्यंग्य -आस्तीन का सांप *********** नाहक परेशान हैं आप  इधर-उधर खोजते हैं आस्तीन के सांप, या फिर बेरोजगार अथवा एकदम बेकार हैं  या शायद बिना आस्तीन के हैं। तभी तो आस्तीन के सांप भी  आपके करीब फटकते तक नहीं हैं। पर मुझे तो लगता है कि आप  बेवकूफ हैं, नादान हैं, पर इंसान नहीं हैं  तभी तो आपको इनकी पहचान नहीं है। वैसे यह भी अच्छा है,  कि कम से कम भारत रत्न के  असली हकदार तो आप नहीं हैं, वैसे भी आपके आस्तीन में सांप  भला पलेंगे भी तो कैसे? उन जहरीले सांपों के कथित, स्वयंभू परवरदिगार  रहनुमा और सरदार भी जब आप हैं। यह और बात है कि आप गिरगिट को भी मात दे रहे हैं, समय-समय पर रंग बदलने में बड़े माहिर लग रहे हैं। कौन कहता है, आप पीड़ित हैं, डसे जा रहे हैं  भगवान भला करें, आप और आपकी फौज का, सौभाग्य से हम तो आपके चंगुल से आजाद घूम रहे हैं, पर राज की एक बात भी सुन लो प्यारे हम आपसे से बड़े और भारी-भरकम  कद-काठी वाले आस्तीन के सांप हैं, शायद आप जानते ही कि हम  अपने आप में किसी शहँशाह ह कम नहीं हैं, हमारी छाया में तुम जैसे जाने कितने पलते हैं  यह और बात है कि हम तुम्हें नजर नहीं आते हैं  पर तुम्हें कभी अपनी नजरों से  ओझल भी नहीं होने देते हैं, बड़ी सफाई से तुम्हें गुमराह करते हैं, क्योंकि आस्तीनों के सांपों के आस्तीन में भी  तुम जैसे सांप पलते रहते हैं  और घमंड में सिर्फ फुफकारते रहते हैं, क्योंकि उनके दांत तो हमने पहले से ही तोड़ रखें हैं या यूँ समझ लो हमने अपने स्वार्थ की खातिर  और भीड़ बढ़ाने के लिए तुम जैसों को पाल रखे हैं, सुधीर श्रीवास्तव  


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy