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Meena Mallavarapu

Abstract Inspirational

4  

Meena Mallavarapu

Abstract Inspirational

आस

आस

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आस का क्या है, हर पल पनपती है

नई नई उमंगों और तरंगों की

 लहरों सी चंचलता को जैसे

हर पल,हर पल, खुद में समेटती है

आस न होती तो ज़िन्दगी

रह जाती सुबकती, सिसकती

देखती रहती मुस्कान को

 मीलों दूर थिरकती


आस और निरास,जीवन के

रंगारंग और बदरंग दो पहलू

कभी भर देते हैं मन में उल्लास

 कभी कर देते हैं हमें बदहवास

है कांटों और फूलों भरी

इस ज़िन्दगी का यही उसूल

दोनों की कीमत

करती है इकट्ठा वसूल


निराशा को कर के पार

बढ़ना है आगे वहां

आशाओं का है संचार

हर पल जहां

जिस चौखट पर न हो पाए

किसी का भी कब्ज़ा

 बसे हों जिसमें केवल

 अपनी आशाओं के साये


माना, हैं यह साये

बस बादलों के जैसे

देखते-देखते हो जाएंगे

 

 आस का क्या है, हर पल पनपती है

 नई नई उमंगों और तरंगों की

 लहरों सी चंचलता को जैसे 

 हर पल,हर पल, खुद में समेटती है

आस न होती तो ज़िन्दगी 

रह जाती सुबकती, सिसकती

देखती रहती मुस्कान को

 मीलों दूर थिरकती


 आस और निरास,जीवन के

 रंगारंग और बदरंग दो पहलू

कभी भर देते हैं मन में उल्लास

 कभी कर देते हैं हमें बदहवास

है कांटों और फूलों भरी 

इस ज़िन्दगी का यही उसूल

दोनों की कीमत

 करती है इकट्ठा वसूल


 निराशा को कर के पार

बढ़ना है आगे वहां

 आशाओं का है संचार

 हर पल जहां

जिस चौखट पर न हो पाए

किसी का भी कब्ज़ा

 बसे हों जिसमें केवल 

 अपनी आशाओं के साये


माना, हैं यह साये 

बस बादलों के जैसे

देखते-देखते हो जाएंगे 

आंखों से ओझल

फिर भी अपने आगे

 नए बादलों की,

 नई आशाओं की

लगती रहेगी कतार


बस लगा दिया है ताला

 नहीं प्रवेश यहां निराशा का

है यहां बस बोलबाला

 हर छोटी-बड़ी आशा का 

पनपने दें हम मन में वह आस 

जो समेटे खुद में उमंगों और तरंगों को

लहरों की चंचलता और मस्ती से बस

खिल उठे हर श्वास।


आंखों से ओझल

फिर भी अपने आगे

 नए बादलों की,

 नई आशाओं की

लगती रहेगी कतार

बस लगा दिया है ताला

 नहीं प्रवेश यहां निराशा का

है यहां बस बोलबाला

 हर छोटी-बड़ी आशा का


 पनपने दें हम मन में वह आस

 जो समेटे खुद में उमंगों और तरंगों को

लहरों की चंचलता और मस्ती से बस

खिल उठे हर श्वास।


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