STORYMIRROR

Dr.Rashmi Khare"neer"

Abstract

3  

Dr.Rashmi Khare"neer"

Abstract

आंसू

आंसू

1 min
278

तुझे डाल ना सकी पत्र

लिखा जो था तू पढ़ नहीं पाती।


मां है मेरी

मुझे रोता देख नहीं पाती

लिखा था मांग का सिंदूर

वैध्यव बन गया।


तू सह नहीं पाती

तेरे आंचल में छुपकर

रोना चाहती थी।


तू देख ना ले मेरे आंसू

एक बार बचपन जीना चाहती थी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract