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Dr.Rashmi Khare"neer"

Abstract

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Dr.Rashmi Khare"neer"

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आंसू

आंसू

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तुझे डाल ना सकी पत्र

लिखा जो था तू पढ़ नहीं पाती।


मां है मेरी

मुझे रोता देख नहीं पाती

लिखा था मांग का सिंदूर

वैध्यव बन गया।


तू सह नहीं पाती

तेरे आंचल में छुपकर

रोना चाहती थी।


तू देख ना ले मेरे आंसू

एक बार बचपन जीना चाहती थी।


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