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sai mahapatra

Abstract

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sai mahapatra

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आजकल

आजकल

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आजकल मेरी जरूरत नहीं है किसीको

आजकल बोझ लगने लगा हूं मैं सबको

आजकल की भागदौड़ भरी

जिंदगी में एक गैर जरूरी

सामान बनके रह गया


कभी जो मेरा हाथ पकड़ कर

चलता था वो आज मुझे

अपने से दूर कर दिया 

आजकल बोलना हो गया है

बड़ा मुश्किल और हात भी लड़खड़ाने लगा है


आजकल मेरे अपनों में ही

मुझे मेरे मौत का सामान नज़र आने लगा है

ना जाने आजकल इए कैसा दौर आया है

चारों तरफ़ बस बेईमानी

झूठ और नफ़रत का साया है।


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