आजादी है वसुधैव कुटुम्बकम
आजादी है वसुधैव कुटुम्बकम
काहे का हिन्दू, सिख, इसाई
या काहे का मुसलमान
भारत का हर बच्चा बच्चा,
खुद में है पूरा हिन्दुस्तान
बात कौम की पहचान की नहीं
तरक्की क्या है ये पहचानने की है
रॉकेट या कंप्यूटर कौम नहीं बनाती
असली इज्जत ज्यादा जानने की है
अपनी थाती पर गर्व करो अच्छी है बात
पर ज्यादा न खोदो, तुम कौन, हम कौन
इतिहास के सच के कई होते हैं माएने
जो बोला वो भी फंसा, और वो भी जो रहा मौन
वैसे अपनी अपनी मौज है
शिगूफा है अपना अपना
कोई पांच वक़्त घुटनों पर आये
या किसी का काम हो माला जपना
कहने को सबके दिल में होता है
छुपा एक हाला का प्याला
पर जीतता है आखरी जंग वही
सच्चा दोस्त बन सके जो सबका निराला
समावेशी संस्कृति असली आजादी है
हिंदुस्तान कहे वसुधैव कुटुम्बकम
किसी से दुनिया में पूछ लीजिये
ऐसा कोई नहीं, जैसा देश हैं हम।
