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Vishal Maurya

Abstract

4.0  

Vishal Maurya

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आजादी चाहिए

आजादी चाहिए

1 min
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मजहब चाहे हज़ार हो ..पर ख़ुदा एक हो ,

ऎसी गलतफहमी में.. जीने वाली.. आबादी चाहिए !


मुल्क के वास्ते ..दो पल ज्यादा चले ,

इस कदर साँसे ...कामकाजी चाहिए !


मजहब, जाति, रंग, आकार, आकृति ...से जो हो परे ,

ऐसी भी देश मे.. एक शादी चाहिए !


कब तलक सीमा पर.. ढेर होते रहेंगे.. हमारे जवान ,

अब दुश्मन की भी होनी कुछ.. मेहमाननवाजी चाहिए !


मैं भले मर जाऊं ...पर मुल्क जीता रहे ,

ऐसी भी मुझे ...बर्बादी चाहिए !


यूँ तो मुल्क को आजाद हुए.. वर्षों हो गए 'विशाल' ,

पर अब भी कुछ है ..जिनसे हमें आज़ादी चाहिए !




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