Suvarna Jadhav
Abstract
देखो आजाद हो गई मैं
गगन में उड़ रही हूं मैं।
खोल दी है बेडीया मैंने
तोड दिए हैं सारे बंधन मैंने।
रुढी परंपराओं को तोड चुकी हूं मैं
अपनी मर्जी से जी रही हूं मैं।
मेहनत और लगन से बदलेगी हवा सारी
मुठ्ठी में कर सकती हूं मैं दुनिया सारी।
रणबांकुरे
भारत हमारा मह...
नशा
जोकर
टीम वर्क
हास्य
नेतृत्व
धरती का खुदा
व्यायाम
ये सब तो नाम का था मुझ तो कुछ भी याद न रहा।। ये सब तो नाम का था मुझ तो कुछ भी याद न रहा।।
फिर भी दिल नहीं भरता लोगों का, फिर भी दिल नहीं भरता लोगों का,
सवाल सी ज़िंदगी है जवाब नहीं कोई... सवाल सी ज़िंदगी है जवाब नहीं कोई...
अंधेरा क्यों पाले जब है यादों के उजाले। अंधेरा क्यों पाले जब है यादों के उजाले।
अब आसान नहीं है, उन सा जी जाना, जो खिल रहें हैं, कांटों को सह के। अब आसान नहीं है, उन सा जी जाना, जो खिल रहें हैं, कांटों को सह के।
तुम्हारे चेहरे पर गुरुर नजर आता है मुझे तो हर तरफ इश्क़ नजर आता है। तुम्हारे चेहरे पर गुरुर नजर आता है मुझे तो हर तरफ इश्क़ नजर आता है।
अचल, विशाल पर्वत अनभिज्ञ प्रारब्ध से, अचल, विशाल पर्वत अनभिज्ञ प्रारब्ध से,
मेरा मन तन्हा तन्हा भटकता है, तिनका आँखों में ही खटकता है। मेरा मन तन्हा तन्हा भटकता है, तिनका आँखों में ही खटकता है।
बदलते वक्त के साथ साथ, बदल रही है सबकी बाते बदलते वक्त के साथ साथ, बदल रही है सबकी बाते
कुछ मंजिल की जिंदगी गई कुछ खुद को जानने में गई। कुछ मंजिल की जिंदगी गई कुछ खुद को जानने में गई।
गम के बिना खुशियों का , पता ना चलता कोई मोल , गम के बिना खुशियों का , पता ना चलता कोई मोल ,
यह एक ऐसी भावना है जो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। यह एक ऐसी भावना है जो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।
पर मैं नहीं थका अब भी , बहुत कुछ करने की तमन्ना , है मेरे भी मन में , पर मैं नहीं थका अब भी , बहुत कुछ करने की तमन्ना , है मेरे भी मन में ,
जिसे पहली बार लिखा होगा किसी ने किसी के लिए।। जिसे पहली बार लिखा होगा किसी ने किसी के लिए।।
खेल में जान लगा देती हैं दोनों टीमें। खेल में जान लगा देती हैं दोनों टीमें।
मन में जो थी खुशी वो बड़ी सुहानी लगी। मन में जो थी खुशी वो बड़ी सुहानी लगी।
मेरी बिटिया तुम मेरे आंगन की चहल-पहल, मेरी बिटिया तुम मेरे आंगन की चहल-पहल,
नींद की ओस से पलकों को भिगोये कैसे। नींद की ओस से पलकों को भिगोये कैसे।
बस मन का फेर होने की देर है बस मन का फेर होने की देर है
स्कूल के समय मिल लेते थे सब तब समय की कमी नहीं थी। स्कूल के समय मिल लेते थे सब तब समय की कमी नहीं थी।