आज तुमपे फिरसे प्यार आ गया
आज तुमपे फिरसे प्यार आ गया
भुला था मैं तुम को छोड़ दी थी मैंने वो गलिया
तुम्हारा हो कर भी तुम्हारा हो ना सका।
याद आते हे वो पल जब तुम सामने होती थी
जैसे आसमानसे कोई परी आई।
हसीं मजाक थो हमारे होते थे
पर तुम्हारी मुस्कुराट सब बे भारी थी।
हर बार सोचा आज बोल तू गा तुम्हें दिल की बात
पर कभी दिल की ज़ुबान खुली नहीं।
तुम्हें खुश देखता तो मैं भी खुश होता था
इसलिए तो तुम्हे खोने के डर से
दिल की बात नहीं बता रहा था।
तुम्हने तो अपनी मंज़िल ढूढ ली थी।
शायद तुम मेरे नसीब में ही नहीं थी
इसलिए बंद किया था मैंने
वो दिल का दरवाजा।
भूल गया था मैं वो रास्ता
आज तुम्हें फिर से देखते ही
न जाने क्यों आज तुम पे फिर से प्यार आ गया।
