STORYMIRROR

akshata alias shubhada Tirodkar

Abstract

2  

akshata alias shubhada Tirodkar

Abstract

आज़ादी मन की

आज़ादी मन की

1 min
44

चलते हुए रास्ते पर कचरे के ढेर दिखे 

मन में आया विचार कब मिलेगी इस कचरे से आज़ादी ?

रास्ते की स्टाल पर दिखा एक बच्चा कर रहा था वहाँ बालमजुरी 

मन में आया विचार क्या होगी उसकी कमजोरी ?

अख़बार में लिखा था बढ़ रहा हे लड़कियों पर अत्याचार 

मन में आया विचार कब मिलेगी लड़कियों को आज़ादी ?

इन्सान ने अपने शौक के लिए पिजरे में बंद पंछी को देखा तो 

मन में विचार आया कब लेगा वो खुलके साँस आज़ादी वाली? 

बिना चपल घूम रहे इंसान को देखा तो 

मन में विचार आया कब मिलेगी उसके पैरों को धूप से आज़ादी ?

गरीब आमिर का फरक देखा तो

 मन में विचार आया कब आज़ाद हो की हमारी मानस्किता स्वार्थीवाली?



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract