STORYMIRROR

vaghela manisha

Abstract Others

3  

vaghela manisha

Abstract Others

आईना तो होने दो..

आईना तो होने दो..

1 min
193

भटक जाऊंगा राह से, रात तो होने दो,

चुराऊँगा उसे भी, थोड़ा सा महंगा तो होने दो।


बदनाम करके मुझे, पूछती है मुझसे नाम मेरा, ये जिंदगी..

झूठ अभी नंगा है ! उसे सच का लिबास तो ओढ़ने दो।


आएगा मजा तुम्हें भी मुझसे उलझकर ए " साहिल ",

अभी तो सिर्फ एक बूंद हूँ, मुझे दरिया तो होने दो।


माना कि टूटा हूँ, बिखर गया हूं ! अभी कांंच हूं इसलिए,

एक दिन तेरा गुरूर भी टूटेगा, मुझे आईना तो होने दो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract