"आदीवासी"
"आदीवासी"
मैं आदीवासी हूँ
खानाबदोश हूँ
पेड़ों के झुरमुट में
सूरज दिखे अंगारा सा
पत्तों की मृगछाला से,
ढांप रही तन को मैं
जंगल के हिंसक पशुओं से
डर नहीं लगता मुझको,
जो दो पांव वाला, सफेद पोश,
वहशी आंखों से देखे मुझे,
उससे मैं डरती हूँ
हां मैं आदीवासी हूँ
खानाबदोश हूँ
कीचड़ भरे उबड़-खाबड़
दलदल, कंटिले, कंकरीट
भरे रास्ते पर चलना,
मैं सीख जाती हूँ
मैं आदीवासी हूँ
खानाबदोश हूँ
पत्तों के थालों में
पत्थर के प्यालों में
हाथों में लिए भालों से
करती हूँ रक्षा खुद की मैं
मैं आदीवासी हूँ
खानाबदोश हूँ
जंगल से फल तोड़
घास फूस की रोटी
माटी के ढेलों का
चूल्हा बना पत्थर से
आग जलाती माई-बाबा
को रोटी खिलाती हूँ
हां मैं आदीवासी हूँ
खानाबदोश हूँ।
