"सुंदर सी कोमल"
"सुंदर सी कोमल"
मेरी बेटी की याद में...
सुंदर सी कोमल
छोटी सी गुड़िया ।
फूल सी पंखुड़ियों
से होंठ तेरे कोमल
नरम-नरम मुलायम
गाल ,गालों में डिम्पल।
सुनहरी भूरे बाल तेरे।
घुंघराले छल्ले वाले ।
अंगूठा चूस कर मस्ती
में नन्हे-नन्हे कदमों से
इधर-उधर भागना तेरा
किवाड़ के पीछे छिप
जाना बहुत याद आता है
पापा की प्यारी बेटी ।
भईया की लाडली बहन
जब भी आँख से आँसू
गिरे गाल पे मेरे नन्हे हाथों
से आंसू पोंछना तेरा ,,
बहुत याद आता है ।
तालू से जीभ को चिपका
मुस्कुरना तेरा याद आता है ।
प्राणों से भी प्यारी थी तू ।
सबकी दुलारी थी तू ।
घूम-घूम नाचती थी ।
दरवाजे के आगे देहरी
पर बैठना, बड़ी-बड़ी
बातें करके हैरान कर
देना तेरा याद आता है ।
चुन्नी लटकाकर झूला
बनाकर, मैं झूला झूलूंगी
झूला झूलूंगी गुनगुनाना
तेरा बहुत याद आता है ।
तू इस जहान में नहीं रही ।
वहां चली गई वापिस
जहां से कोई आता नहीं।
मैं प्रभु के चरणों में प्रार्थना
करती हूँ, तेरी आत्मा को
शांति मिले, तू भगवान की
गोद में जा विराजे प्रभु तेरी
आत्मा को अपनी गोद में
ले कर जाये निज धाम
मेरी प्यारी बेटी कोमल
सिगरेट की खाली डिब्बी
से चूड़ियां बना कर गोल
मटोल बाजुओं में चूड़ियाँ
डालकर खेलना तेरा बहुत
याद आता है घुंघराले
बालों के बीच गुलाब का
फूल लगाना बहुत याद
आता है, चारपाई पर
पैर लटकाए तेरा गीत
गुनगुनाना बहुत याद
आता है।
