बसंत का आगमन
बसंत का आगमन
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आया बसंत चारों ओर उमंग छाया ।
धरती ने धानी चुनरी ओढ़कर सजाया ।
खिले फूल सरसों के चहुँ ओर भंवरे
ने कलियों पे गीत गुनगुनाया ।
सबका दिल झूम उठा पत्ता
पत्ता महकाया ,फूलों की डालियों पे
तितली उड़ती फिरे मस्ती में अपने
को फूलों में छुपाया,मेरा मन मोहन
राधा की चोटी में फूल सजाया
जैसे पिताम्बर ओढ़कर मधुसूदन आया ।
राधा बनी कृष्ण कृष्ण बने राधा ।
