26/11
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जीवन पथ पर जब चलना सिखाती है,
वही जिंदगी में अपना ईमाम बनाती है,
सुलगती उंगलियों से शीश नवाहती है,
हर अरमान में भी ज्योत जलाती है,
कुछ तुममें कुछ हममें एक नया अहसास जगाती है,
नई पीढ़ी का नया मार्ग बनाती है,
उन हंसी वादियों में जब अपना शीश नवाती है!
गोलियों कि बौछारों से तब भी वो शीश अपना नवाती है!
सही मार्ग पर काँटा बन कर जब काँटों कि तरह खड़ी रह कर बौछारें चलाती है!
वो अपना हर फर्ज को अपने खून से निभाती है!
पथ पर अपने मार्ग का सही दृश्य जब देती है!
सबको सबक सिखाती हैं, फिर वो अपनी जिंदगी को
उन वादियों में खड़ा होकर खून से
लदे हुये तिरंगे में खुद शहीद हो कर लिपट जाती हैं!
जब तुम अपना त्यौहार मनाते हो,
तब भी वो हर त्यौहारों को अपनी देश की
रक्षा करने के लिये अपना खून बहा कर निभाती हैं!
ऐसे वीर जवानों को हमारी देश की रक्षा करने वाली सेनाओं को ढ़ेर सारी हार्दिक शुभकामनायें!
