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क्या चाहिए

क्या चाहिए

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"अनुज बेटा ..... ब्रेकफास्ट रेडी है, आजा फटाफट, अरे कितनी देर लगाएगा बाथरूम में, सो गया क्या, देख स्कूल में लेट हो रहा है, जल्दी से आजा, अरे सुनता नहीं क्या, कब से पुकार रही हूं।"

अपने इकलौते बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना देख रहे वंदना और उसके पति बेटे को बहुत अच्छे स्कूल में शिक्षा दिलवा रहे हैं, स्कूल से सीधे कोचिंग क्लास में भेज रहे हैं, देर शाम आये बेटे को स्कूल का होमवर्क और कोचिंग में पढ़ाये गए लेसन का रिवीजन करवा रहे हैं, हर समय बस पढ़ाई ... पढ़ाई और इसके सिवा कोई बात नहीं। बेटे के पैदा होते ही दोनों ने उसको क्या बनाना है सोच लिया था ......और इसी कारण दोनों पति पत्नी काम कर रहे हैं ताकि उनका बेटा एक बड़ा आदमी बन सके। वंदना अनुज के कमरे में जा कर देखती है वो अभी भी बाथरूम के अंदर ही है ....

"अरे क्या हुआ अनु .....क्या कर रहा अंदर, साढ़े छः बज रहे हैं, स्कूल बस आने वाली है तेरी।"

और बाथरूम का दरवाजा थपथपाती है लेकिन कोई प्रतिक्रिया ना देख कर जोर जोर से चिल्लाते हुए दरवाजा पीटने लगती है, शोर सुनकर अनुज के पापा उठकर आते हैं और पूछते हैं ....

"अरे क्या हुआ क्यों चिल्ला रही हो सवेरे सवेरे।"

"देखिए ना कब से आवाज़ें लगा रही हूं और दरवाजा पीट रही हूं लेकिन ये लड़का है कि सुन ही नहीं रहा, न जाने अंदर जाकर सो गया क्या।"

अनुज के पापा भी बेटे को आवाज लगाते हैं और दरवाजा ना खुलने पर दरवाजा जोर जोर से धक्का देकर चिटकनी तोड़ डालते हैं ....

बाथरूम के फर्श पे अनुज को बेहोश पड़ा देख दोनों पति पत्नी घबरा जाते हैं दौड़ कर अनुज के पापा पड़ौसी डॉक्टर गुप्ता को लेकर आते हैं .....चेकअप करने के बाद गुप्ता जी अनुज को इंजेक्शन देते हैं और अनुज के मम्मी पापा को बोलते हैं ..."मेंटल स्ट्रेस के कारण आपके बेटे की ये हालत हुई है, ये बच्चा ज्यादा तनाव नहीं झेल सकता इसलिए इसका बहुत ध्यान रखना होगा।"

अनुज के मम्मी-पापा एक दूजे की शक्ल देखते हुए मौन सवाल करते हैं बेटा चाहिए या इंजीनियर....!


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