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कामवाली से सीखो
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© ankita naidu

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 फोन की घंटी बजते ही शालिनी ने देखा तो अमृता जी का फोन था. जी नमस्कार ,अमृता जी कैसे हैं आप लोग .मैं आप ही लोगों के बारे में सोच रही थी शालिनी ने कहा. अमृता -हम सब तो ठीक हैं .आपसे कुछ जरूरी बातें करनी है . हम लोगों का आप के घर में आकर बात करना तो ठीक नहीं रहेगा .क्योंकि नेहा के पापा (शालिनी के पति) की तबीयत ठीक नहीं रहती,.हो सके तो आप ही हमारे घर आ जाइए.ठीक है आज शाम को मिलते हैं .हो सके तो नेहा को मत लाइएगा . बिना शालिनी का जवाब सुने ही अमृता ने फोन काट दिया.

 शालिनी एक हाउसवाइफ है .पति अविनाश का शहर में बहुत बड़ा साड़ियों का होलसेल दुकान है. शहर के कलेक्टर से लेकर आम आदमी तक उनकी दुकान से साड़ियां खरीदते हैं .जिस कारण शहर के नामी गिरामी लोगों में अविनाश और शालिनी को गिना जाता है .उनकी एक ही बेटी है. नेहा MBA कर रही है.उसी ने रोहन को पसंद किया था. रोहन से उसकी शादी भी घर वालों की मर्जी से हो रही थी .रोहन के पिता के दो कॉलेज थे और रोहन खुद भी रियल एस्टेट का काम किया करता . परिवार वालों को कुछ देखना ही नहीं पड़ा.आँख मूंदकर नेहा की पसंद को हामी भर दी. 

रोहन और नेहा जैसे एक दूसरे के लिए बने थे. अभी एक महीने पहले ही उनकी सगाई हुई थी और 5 महीने बाद शादी होने वाली थी. घर में उसी की जोर शोर से तैयारियां चल रही थी.पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था.अविनाश को मेजर हार्ट अटैक आया. समय पर डॉक्टर को दिखाने के कारण वह बच गए .पर डॉक्टर ने सख्त हिदायत दी थी दूसरा अटैक कभी भी आ सकता है अगर उनसे गंभीर बातें ,ज्यादा काम ना कराया जाए .खुश रखा जाए तो वह ठीक रहेंगे. अब दुकान को संभालना मुश्किल था. इसलिए दुकान को बेच दिया गया .दुकान बेचने से आए रकम अविनाश के इलाज पर खर्च होते और बाकी नेहा की शादी की तैयारी में लग गए. जितने धूमधाम से शादी की तैयारी हो रही थी अब साधारण होने लगी.

जल्दी-जल्दी घर के काम निपटाकर शालिनी बिना कुछ अविनाश को बताएं अमृता के घर गई .जो लोग उसका आदर संस्कार करते थकते नहीं थे वह बैठने तक नहीं बोले .थोड़ी देर बाद शालिनी खुद ही बैठ गई .पिछली बार उसके घर पहुंचने पर पूरी टेबल को खाने से सजा दिया गया था.आज सिर्फ उसे पानी दिया गया. अमृता उसके पति और बेटा रोहन भी आकर बैठ गए .शालिनी,..शालिनी को अपना नाम सुनकर अटपटा लगा. जो अमृता उसे शालिनी जी कहती थी आज शालिनी कह रही थी. अमृता ने सीधा कहा देखो शालिनी भाई साहब की तबीयत ठीक नहीं रहती दुकान भी तुम्हें बेचनी पड़ी. अब तुम लोग हमारे स्टेटस के लायक नहीं रहे. हम यह रिश्ता अब और नहीं निभा सकते. हम इसे यहीं खत्म करते हैं.

पर मेरी बात तो सुनिए.हम लोगों या नेहा से कुछ गलती हो गई है क्या . देखिए ऊपर नीचे हर घर में होता है .हम शादी में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे .पूरे शहर में यह शादी के चर्चा है.कितनी बदनामी होगी सो अलग .शादी क्यों तोड़ी गई है यह ना जानकर सब मेरी बेटी में कमियां बोलेंगे.ऐसा मत करिए .बेटा रोहन तुम तो नेहा को जानते हो .वह तो तुम्हारी पसंद है.तुम अपने मम्मी पापा को समझा सकते हो बेटे.

 देखिए मम्मी जी सॉरी आंटी .मेरे मम्मी पापा ने सोच समझ कर फैसला किया होगा. मैं अपने मम्मी पापा के फैसले के खिलाफ नहीं जा सकता .उन्होंने जो कुछ सोचा होगा मेरी भलाई के लिए ही. नेहा को भी बता दीजिएगा और हां यह रही सगाई की अंगूठी .रोहन अंगूठी टेबल पर रख दी और खड़े हो गया . बेटा मेरी बात तो सुनो रोहन .शालिनी से मुंह फेर लेने पर वह वहां से चले जाने में ही भलाई समझी.

रास्ते भर इसी उधेड़बुन में थी अविनाश और नेहा को कैसे बताए .घर पहुंचने पर अविनाश आराम कर रहे थे नेहा भी घर आ चुकी थी .मम्मा मैं 2 दिन से रोहन का फोन ट्राई कर रही हूं लग नहीं रहा .मेरे मैसेज का जवाब भी नहीं दे रहा. अरे आज श्यामा नहीं आई कितने बर्तन जमा हो गए हैं,.जब आएगी तो अच्छी खबर लूंगी .मम्मा मैं क्या बोल रही हूं.इतनी सीरियस बात बोल रही हूं और आपको श्यामा की पड़ी है .ठीक है आपको नहीं सुनना है तो मत सुनिए मैं रोहन के घर जा रही हूं.

खबरदार जो रोहन के घर एक कदम भी रखा .जोरों की आवाज सुनकर अविनाश भी कमरे में आ गए और नेहा वही ठिठक कर खड़ी हो गई. यह लो अंगूठी रोहन ने वापस कि .यह अंगूठी वापस करने का मतलब समझती हो ना अब हम लोग उन लोगों के काबिल नहीं रहे . मैं नहीं मानती मम्मा आप झूठ बोल रही है

  नेहा रोती हुई बोली. तुझे अपनी मां पर विश्वास नहीं तो यह अंगूठी मेरे पास कैसे आई बोलो .खुद रोहन ने दी .सभी रिश्तेदार को खबर कर दी जाए कि सगाई टूट गई है और अगर रोहन या उसके घर वालों का नाम लिया तो मुझसे बुरा कोई ना होगा .नेहा और अविनाश चुप रहने में ही भलाई समझी.

 वह रात उनके लिए काटना मुश्किल था .अब क्या होगा अविनाश .नेहा का तो रो रो कर बुरा हाल है .समाज में हमारी क्या इज्जत रहेगी .तुम चिंता मत करो शालिनी . मेरी सिर्फ तबीयत खराब है मुझे ठीक हो जाने दो शालिनी अविनाश ने कहा .नेहा को संभालो .उस पर नजर रखना अभी उसे सबसे ज्यादा हमारी जरूरत है.

अगले दिन जैसे तैसे शालिनी घर का काम निपटा रही थी. नेहा तो अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकली. डोर बेल बजी सामने श्यामा (कामवाली) थी .शालिनी ज्वालामुखी के सामान उस पर फूट पड़ी .क्यों रे क्या हुआ अभी फुर्सत मिली .कहां घूम रही थी .तुम लोग ऐसा ही करते हो 1 दिन काम में आना 4 दिन छुट्टी मारना. क्या बताऊं दीदी .मेरा आदमी इस दुनिया में नहीं रहा और श्यामा जोर जोर से रोने लगी.उसकी आवाज सुनकर अविनाश और नेहा अपने कमरे से बाहर आ गए .रोज की तरह उस दिन भी काम पर गया था रात को घर आकर सो गया अगले दिन उठा ही नहीं .डॉक्टर भी कुछ नहीं बोल रहे हैं श्यामा रोते हुए बोली.

कितने दिन हो गए हैं शालिनी ने पूछा. अभी 5 दिन .और तू काम पर आ गई. क्या करूं दीदी सब रिश्तेदार गांव वाले चले गए. बच्चे और पेट पालने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा ना .कब तक ऐसा चलेगा . कब तक दूसरों के भरोसे पर रहूंगी.आप कह रही थी ना कि आपकी सहेली को भी काम वाली चाहिए मैं काम करने तैयार हूं .पहले से ही 8 घर काम करती है और कितने करेगी शालिनी ने पूछा .थोड़ी और कमाई हो जाएगी दीदी .बस बच्चों को अपने पैर पर खड़ा कर दूं .फिर मैं मुक्ति पाऊ. और वह काम करने चली गई.

 नेहा शालिनी अविनाश तीनो एक दूसरे का मुंह ताकने लगे .फिर अविनाश ने कहा आज नेहा की सिर्फ सगाई टूटी है तो हम सब ऐसे हो गए जैसे हमारी दुनिया ही लुट गई .शादी के पहले ही उन लोगों का असली चेहरा पता चल गया अगर शादी के बाद पता चलता की वह लोग सिर्फ पैसे के भूखे है लालची हैं तो हमारी नेहा को कोसते .हम सब घर के ना घाट के हो पाते. नेहा के लिए हम कोई और लड़का ढूंढ लेंगे .हमारी नेहा में कमी थोड़ी ना है .और लोगों को क्या समय के साथ सब भूल जाएंगे. हमारी नेहा सुंदर है पढ़ी लिखी है .कल को नौकरी मिलेगी तो लड़कों की लाइन लग जाएगी. सही तो कह रहे हैं पापा .मम्मा नेहा शालिनी गले मिलते हुए बोली. नेहा अपने कॉलेज चली गई और शालिनी चाय बनाने और अब काली रात खत्म हो चुकी थी नया सवेरा हो चुका था.

दोस्तों ,सही बात तो है .कई बार हमारे साथ कुछ अप्रिय हो जाए तो हम नियति को कोसने लगते हैं पर हमें ऐसे लोगों से सीख लेनी चाहिए जिनके परेशानियों के सामने हमारी परेशानी कुछ मायने नहीं रखती फिर भी वह लोग परेशानियों के साथ डटे रहते.

सीख़ समाज़ हिम्मत

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