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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

आज सोचा तो आँखें भर आई

आज सोचा तो आँखें भर आई

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शाम का धुंधकला अब सिमट आया था। बालकनी में खड़ी खड़ी नमिता उदासी हो गई थी। उसकी जुबान पर आज सुबह से इस ग़ज़ल की कुछ पंक्तियां बार-बार आ रही थी...

आज सोचा तो आंसू भर आए, मुद्दतें हो गई मुस्कुराए!"


भर आई आँखों से नमिता अक्सर उन पलों को याद करती थी, जब उसके आसपास लोग मंडराते रहते थे और वह कामयाबी के शिखर पर थी। तब उसके कितने दोस्त हुआ करते थे।

दरअसल...

 नमिता एक मॉडल थी और बहुत ही सफल मॉडल थी। लेकिन एक हादसे में उसकी खूबसूरती जाती रही थी। हुआ यह था कि एक ट्रेन एक्सीडेंट में उसकी दाएं गाल पर काफी चोटें आई थी। इलाज के बाद घाव तो ठीक हो गया था पर दाग रह गया था। इसलिए अब उसे उसी मॉडलिंग के असाइनमेंट मिलने बंद हो गए थे। और जब सफलता कम हो गई थी तो उसके आसपास मंडराने वाले लोग भी कम हो गए थे।


अब जब धीरे-धीरे उसके उसकी कामयाबी कम होने लगी और सफलता के झंडे की संख्या कम होने लगी तब उसके तथाकथित दोस्त उससे कतराने लगे थे।


इसलिए आज वह बहुत दुखी होकर अपने पति सुरेश से कह रही थी,


" याद है ... पहले कितने लोग मेरे आस-पास रहते थे । अब तो सब आया गया हो गए हैं। और मैं अपने आप को बहुत अकेला पा रही हूं ! "


 तब सुरेश ने उसे बहुत प्यार से समझाया,


"ऐसा मत सोचो नमिता! आज भी तुम्हारा परिवार तुम्हारे साथ है। बच्चे तुम्हारे साथ हैं, मैं तुम्हारे साथ हूं। और इसके अलावा कुछ गिने-चुने दोस्त हैं जो दुख सुख में तुम्हारे साथ हमेशा खड़े हैं। जो तुम्हारे अपने हैं, हर हाल में साथ निभाते हैं। उन्हें हमेशा अपनाकर रखो और जो आया गया है, उन सबको भूल जाओ। जीवन का क्रम ऐसा ही है।सफलता मिलती है तो लोग आते हैं और जब हम असफल होने लग जाते हैं, तो लोग हमसे दूर चले जाते हैं। ऐसे आया गया लोगों की परवाह मत करो और जो हासिल है उसमें खुश रहने की कोशिश करो!"


नमिता को सुरेश की बात बहुत अच्छी लगी।

 और उसने इस बात को गांठ बांध लिया कि,

 आया गया को छोड़कर जो सामने है उसे

 अपनाना है, और उनके साथ ही जिंदगी के

 सफर में आगे कदम बढ़ाना है।


 अब तो नमिता और सुरेश अक्सर यह पंक्तियां दोहराते...


कष्ट के धूप से व्यक्तित्व चमकता और होता मशहूर है,

लगातार अगर चलते रहें कदम तो किनारा मिलता जरूर है !

जो समय की कद्र करते हैं उन्हीं का समय बदलता है,

गहन तिमिर को चीरकर ही उजास खिलता चंहु ओर है!



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