STORYMIRROR

Indu Mehta

Inspirational

4  

Indu Mehta

Inspirational

मंजिल की ओर

मंजिल की ओर

1 min
2.4K

ऐ राही तू चलता जा‌, अपनी मंजिल पाने को

यही मिला है वक्त तुझे, कुछ करके दिखलाने को


माना राह कठिन है तेरी, मन विचलित हो सकता है 

लेकिन मंजिल से पहले, तू कैसे सो सकता है

मंजिल भी तो तड़प रही है, तुम से ही मिल जाने को

यही मिला है वक्त तुझे, कुछ करके दिखलाने को


जीवन की कितनी राहें, तुम को भटकाना चाहेंगी 

सुख आराम की हवाएं, तुमको बहलाना चाहेंगी

पर तू अर्जुन बनके देखना, बस अपने निशाने को

यही मिला है वक्त तुझे, कुछ करके दिखलाने को


ऐ राही तू चलता जा‌, अपनी मंजिल पाने को

यही मिला है वक्त तुझे, कुछ करके दिखलाने को।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational