Krishna Khatri
Abstract
प्रज्वलित कर लो
दीप मन का
हो जाएगा रोशन
सारा जहां
लौ से लौ मिलाकर
चलो तुम
हो जाएगी तुम्हारी
आसान डगर
तब आएगी नज़र
सामने मंजिल भी
अपने आप
चमक उठेगा हर चेहरा
दुबक जाएगा तम सारा
उजला हो जाएगा परिवेश !
यही इल्तिजा ह...
जब तक मीठा न ...
फितरत !
जी भर के जी ल...
जी लेंगे हम द...
आंखों ने देखा...
खलिश !
अश्रु मेरे .....
मां तुम अमृता...
अब रोटी में वो बात नहीं अब रोटी में वो स्वाद नहीं! अब रोटी में वो बात नहीं अब रोटी में वो स्वाद नहीं!
इतने से भी तेरी व्यथा, कभी कम न होगी, मां-बाप और समाज, सबसे कट जाओगे। इतने से भी तेरी व्यथा, कभी कम न होगी, मां-बाप और समाज, सबसे कट जाओगे।
हे मेरे ईश्वर हे मेरे ईश्वर सुन ले बस..एक यही अरज उमंग। हे मेरे ईश्वर हे मेरे ईश्वर सुन ले बस..एक यही अरज उमंग।
कह रही है इक वीरांगना, मुझसे मेरी भू मत माँगना। कह रही है इक वीरांगना, मुझसे मेरी भू मत माँगना।
अब यहां मेरे सिवाय कोई नहीं रहेगा, देखता हूं, मैं सब में हूं, सभी है मुझ में। अब यहां मेरे सिवाय कोई नहीं रहेगा, देखता हूं, मैं सब में हूं, सभी है मुझ में।
हर कोई तो बन्दे तेरे प्रभु जीव जंतु पेड़ पौधें या इंसान।। हर कोई तो बन्दे तेरे प्रभु जीव जंतु पेड़ पौधें या इंसान।।
ठंड नहीं है, फिर जला अलाव, उस पर हाथ सेंकना क्या।। ठंड नहीं है, फिर जला अलाव, उस पर हाथ सेंकना क्या।।
तुम हालातों की भट्टी में… जब-जब भी मुझको झोंकोगे… तब तपकर सोना बनूंगा मैं… तुम हालातों की भट्टी में… जब-जब भी मुझको झोंकोगे… तब तपकर सोना बनूंगा मैं…
आते- जाते लोग बस कीमत ही पूछ कर निकल जाते हैं जाते-जाते गरीबों की थोड़ी सी उम्मीद आते- जाते लोग बस कीमत ही पूछ कर निकल जाते हैं जाते-जाते गरीबों की थोड़ी सी उम...
प्यार तुझसे ही करूं और सब तो धोखा है। प्यार तुझसे ही करूं और सब तो धोखा है।
हर - पल आकर यादों में, जगा दिया मुझे आपने हर - पल आकर यादों में, जगा दिया मुझे आपने
जो उसकी बख्शी मासूमियत से, जीवन के हर पल को संभाल ले जाता है। जो उसकी बख्शी मासूमियत से, जीवन के हर पल को संभाल ले जाता है।
माना अभी इंसानियत थोड़ी जिन्दा है, लापरवाही मुनाफाखोरी कहीं ज्यादा है, माना अभी इंसानियत थोड़ी जिन्दा है, लापरवाही मुनाफाखोरी कहीं ज्यादा है,
सूना पड़ा गाँव अब बचपन की वो धूल नहीं उड़ती है ! सूना पड़ा गाँव अब बचपन की वो धूल नहीं उड़ती है !
वह भी थे, एक माँ की संतान, उनके भी थे कुछ अरमान। वह भी थे, एक माँ की संतान, उनके भी थे कुछ अरमान।
जैसे-जैसे, एक-एक करके, घड़ी बीतती जा रहीं थी, जैसे-जैसे, एक-एक करके, घड़ी बीतती जा रहीं थी,
जो अपने जीवन को रेत की तरह फिसलता देख रही है जो अपने जीवन को रेत की तरह फिसलता देख रही है
कठिन होता है कठिन तो होता ही है अपनी सीमा में रहना। कठिन होता है कठिन तो होता ही है अपनी सीमा में रहना।
डॉक्टर हैं असली योद्धा करना चाहिए इन पे सभी को नाज, डॉक्टर हैं असली योद्धा करना चाहिए इन पे सभी को नाज,
लौटकर तू आजा एक बार सही ग़म-ए-जुदाई अब कर दे तू ख़त्म। लौटकर तू आजा एक बार सही ग़म-ए-जुदाई अब कर दे तू ख़त्म।