STORYMIRROR

Vigyan Prakash

Abstract

4  

Vigyan Prakash

Abstract

भारत

भारत

1 min
315

मैंने कॉपी से फाड़ा एक कागज

कागज पर लिखा बिहार

और एरोप्लेन बना कर उड़ा दिया।


कागज पहुंचा अस्सी घाट,

गंगा आरती की उधेड़बुन में

किसी ने उस पर लिखा बनारसी

तो किसी ने यू पी

और फेंक दिया गंगा जी में।


बहते बहते वो पहुँचा बंगाल

जहाँ किसी ने लिख दी बंगाली।

और फिर समुंदर तट से होता 

वो पहुँचा निचे की ओर

जहाँ किसी ने मलयालम में 

लिख डाला कर्नाटक।


ऐसे ही उड़ते बहते 

हर जगह का नाम आया उस पर।

फिर जाने कैसे दिल्ली में 

हाथ किसी मंत्री के लगकर

लिखवा लाया दलित।


उसको देख के कागज छीन 

कोई लिख आया क्षत्रिय।

ब्राह्मण कैसे पीछे रहते 

वो भी अपना नाम लिखा आये।


धीरे धीरे घूमते फिरते 

लौट आया वो मेरे छत पे

मुड़ा वुड़ा मुर्झाया सा

मैंने सब नामों को घेर 

लिख डाला भारत।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract