Suresh Kulkarni

Classics


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Suresh Kulkarni

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भक्ती प्रीती

भक्ती प्रीती

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एक पान तुळशीचे 

देई खरा न्याय तो


सुवर्ण रत्ने माणके 

तुळशीपुढे हलकी


अमोल मोल भक्तीचे 

खेळ अजब प्रीतीचे 


खेळी स्वतः भगवंत तो

ठेवा दृढ विश्वास तो


जय रुक्मिणी रमणा

जय रुक्मिणी रमणा


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