यह बहू है हमारी नौकरानी नहीं
यह बहू है हमारी नौकरानी नहीं
आज स्वाती सुबह से ही बहुत बिजी थी।क्योंकी आज उसकी ताई सास और ताया ससुर आ रहे थे। स्वाति की शादी अब से 4 महीने पहले हुई थी। जिसमें उसकी ताई सास बीमारी के चलते नहीं आ पाई थी।
वह अब नई बहू को देखने के लिए आ रही थी। इसीलिए उसकी सास मनोरमा जी ने आज सुबह ही उसे कहा था। उसे ताई सास के पसंद के खाने बनाने को।शाम के वक्त वे आ गऐ।।स्वाती उन्हे नाश्ता कराकर कुछ देर उनके पास बैठकर किचन मे चली आई।उसे रात के खाने की तैयारी करनी थी।उसके सास ,ससुर, ताई सास और ताया ससुर बेठे आपस मे बाते कर रहे थे।
स्वाती ने सोचा मीठे मे वह गाजर का हलवा बना लेगी। क्युकी उसकी सास ने सुबह बताया था। कि विमला दीदी को गाजर का हलवा बहुत पसंद है।लेकिन परेशानी यह थी की उसे खाने में और भी आइटम बनाने थे। और गाजर के हलवे में काफी टाइम लगता है। इसलिए उसने सोचा की गाजर सासु मां को दे आती है। इतने वह और काम करेगी। तब तक वह गाजर कद्दूकस कर देंगी। और वह उनके पास गाजर लेकर चली गई। उसने उनसे कहा
"मम्मी जी मैं खाना बना रही हूं आप यह गाजर कद्दूकस कर दीजिए। उन्होंने कहा ठीक है बेटी तुम और काम कर लो मैं यह गाजर कद्दूकस कर दूंगी।" वह जाने के लिए मुड़ी ही थी।तभी उसकी ताई सांस बोली
"अरे देखो तो सही कैसे सास को काम बता रही है। जैसे सास छोटी हो। यह सास को तो ऐसे काम बता रही है कि यह सास की बड़ी हो। अरे जब तुम हो काम करने के लिए तो फिर मनोरमा से क्यों कह रही हो।
अरे देखो तो सही बहू के सामने सास काम करती हुई कोई अच्छी लगेगी। बहू तुम्हें इसलिए लेकर आए हैं कि तुम सास को काम बताओ। बताओ यही संस्कार है तुम्हारे।"
यह सुनकर स्वाति रुहांसी हो गई उसकी आंखों में आंसू आ गए। तभी उसकी साथ मनोरमा जी बोली-
"दीदी कोई बात नहीं मैं एक दो काम कर लूंगी तो क्या हो जाएगा। कोई बात नहीं बेटा तुम जाओ मैं यह काम कर लूंगी।" तभी विमला जी बोली-
"आज यह एक काम बता रही है, कल को सारे काम तुम्हीं से कराएगी तब पता चल जाएगा। बेठा लो इसे सर पर।" यह सुनकर मनोरमा जी को बहुत बुरा लगा उन्होंने कहा
"दीदी यह बहू है हमारी, नौकरानी नहीं उसने अगर एक काम बता दिया तो क्या हुआ काम ज्यादा था तभी उसने कहा नहीं तो वह बेचारी खुद कर लेती है। और इसमें सास, बहू वाली यह बड़े ,छोटे वाली बात कहां से आ गई।" तभी मनोरमा जी के जेठ बोले
"मनोरमा! तुम सही कह रही हो। में विमला को यही समझाता हूं। लेकिन ये नही समझती उल्टा यही कहती है कि में बहु का पक्ष ले रहा हूँ। हम बहू को बहू नहीं समझते नौकरानी समझते हैं। कि सारा काम वही करे अगर उसने एक दो काम बता दिए तो यूँ समझते हैं कि हमारी शान में कमी आ गई। जबकि यह बहुत गलत बात है। और विमला! हमारी बेटी भी तो जब काम ज्यादा होता है, हमें साथ लगने को कहती है। तब यह उनकी बात हमें बुरी नहीं लगती। लेकिन यही बात अगर बहू कह दे तो बुरी लगती है। यह बहुत गलत है । बल्कि बेटियों के तो कहने की भी नौबत नहीं आती। जब काम ज्यादा होता है तो हम खुद ही उनके साथ लग जाते हैं। यही बहु के साथ भी होना चाहिए। क्योंकि वह हमारी बहू होती है नोकरानी नहीं। जब हम यह नहीं समझते तो इन सब से परेशान होकर वह हमसे अलग चली जाती है। तब भी हम गलतियां बहू की ही निकालते हैं। जब के गलती सारी हमारी होती है।" विमला जी को भी अपनी गलती का एहसास हो गया था।वह बोलीं
"सही कह रहे हैं जी आप!मुझे यह समझने में गलती हो गई। बहू मुझे माफ कर देना जो मैंने तुम्हारे बारे में ऐसा सोचा।" स्वाति ने कहा
"कोई बात नहीं दीदी आज से और अभी से एक नई शुरुआत की है कि अब से बहू को नौकरानी नहीं बेटी की तरह समझिए ।"
मनोरमा ने विमला जी से कहा तो विमला जी भी मुस्कुरा कर बोली
"हां तुम सही कह रही हो मैं वाकई अब से एक नई शुरुआत करूंगी जिसमें मेरी बहू नोकरानी नहीं मेरी बेटी हो की तरह ही रहेगी और मुझे यह सब समझाने के लिए तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद।"
"कोई बात नहीं ताई जी आप बड़े हैं मैंने बुरा नहीं माना।" और गर्व से अपनी सास की तरफ देखा और किचन में चली आई। फिर सोचने लगी कि उसकी सास कितनी अच्छी हैं। जो उसे समझती हैं। अगर सबकी सास ऐसी ही हों तो घर में लड़ाई झगड़े ना हो।
