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AlifSha saifi

Drama Inspirational

4  

AlifSha saifi

Drama Inspirational

रिश्ते प्यार और विश्वास के 1

रिश्ते प्यार और विश्वास के 1

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पापा अबकी बार हमारे सारे फ्रेंड मेला देखने जा रहे हैं। हम भी मेला देखने जाएंगे। आप हमें लेकर चलेंगे ना?"

"बच्चों ने रवि के ऑफिस से आते ही फरमाइश शुरू कर दी। मेरठ में हर साल नौचंदी का मेला लगता है।

" बेटा अगले साल मेला देखने चलेंगे इस बार ऑफिस के बहुत जरूरी काम है और तुम्हें तो पता ही है कि मेला रात में लगता है। फिर अगर मैं रात में तुम्हें मेला लेकर जाऊंगा तो फिर सुबह में ऑफिस कैसे जाऊंगा। रवि ने बच्चों को बहलाया।

" पापा आप तो हर बार ऐसे ही बहाना बना देते हैं। सब यहां मेला देखने आते हैं और हम यहीं रहते हैं। लेकिन मेला नहीं देख पाते। हम सैटरडे की नाइट को चलेंगे संडे के दिन आपकी छुट्टी रहती है ना।"

" नहीं बेटा इन दिनो मेरा वर्क ज्यादा है। इसलिए मुझे संडे के दिन घर पर काम करना होगा। रवि ने बच्चों को फिर बहलाया।

" बेटा जब बच्चे की जिद कर रहे हैं तो लेकर चल ना। इनके बहाने हम भी मेला देख आएंगे। तू हर बार ऐसे ही मना कर देता है।"

सविता जी ने कहा तो रवि ने उनकी तरफ शिकायत भरी नजरों से देखा। जैसे कह रहा हो आपको तो हर बात का पता है।फिर भी आप बच्चों के सामने ऐसी बात कर रही हैं। लेकिन सविता जी ने समझ भी नजरअंदाज कर दिया और बोलीं।

" साल में एक बार ही तो मेला लगता है उसमें भी हर बार बच्चों को मना कर देते हो। देखो बच्चों की तबीयत खराब हुई है। बच्चे भी घर में बोर हो गए हैं। वहाँ जाएंगे तो बच्चों का मन भी बहल जाएगा और हम भी चलेंगे हम भी कहां जाते हैं घूमने, बच्चों के बहाने हम भी घूम आएंगे।" रवि ने बच्चों और मम्मी पापा को जिद करते देखा तो मन मारकर हां कर दी।

" ठीक है हम मेला 8 दिन बाद देखने चलेंगे इतने मैं भी जो काम पेंडिंग पड़े हैं वह कर लूंगा। रवि की बात सुनकर बच्चे और उसके माता-पिता सविता जी और दिनकर जी खुश हो गए।

मेरठ में हर साल नौचंदी का मेला लगता है बच्चे वही जाने की जिद कर रहे थे

" आपने मेले में जाने के लिए उनको हां तो कर दी है। लेकिन मेले में कोई यूं ही थोड़ी ना जाता है, पैसे कहां से आएंगे।"

"अब जबकि मम्मी जी भी बच्चों के सामने जिद करने लगीं तो कहीं ना कहीं से इंतजाम करूंगा और चलेंगे बच्चों को मेला दिखाने।" वैसे तो रवि की ठीक-ठाक जॉब थी । मगर कोरोना काल में जो भी बचत अच्छे बुरे वक्त के लिए की गई थी। वह सब खत्म हो गई जहां वह जॉब करता था उन्होंने इतने टाइम की सैलरी तो नहीं दी थी लेकिन जॉब बच गई थी यही बहुत था।

रवि अपने माता पिता और पत्नी तृप्ति और उनके दो बच्चे बड़ा बेटा अविनाश और छोटा बेटा रूद्र के साथ रहता था।रवि का एक बड़ा भाई भी था। जो अलग रहता था। उनका अच्छा खासा कारोबार था। लेकिन माता पिता रवि के साथ ही रहते थे। क्योंकी बड़ी बहू के साथ उनकी बनती नहीं थी। सविता जी हद से ज्यादा रोकटोक करने वाली औरत थी। इसी वजह से बड़ी बहू से उनकी बनती नहीं थी। रवि की दो बहने भी थी जिनकी शादी हो चुकी थी।

रवि अब सोच रहा था। कि वह कैसे अपने परिवार को मेला दिखाने ले जा सकता है। जबकि महीने की पूरी सैलरी तो खत्म हो चुकी है और लगभग आधा महीना भी बाकी है। क्योंकि पहले ही दोनों बच्चों की बहुत ज्यादा तबीयत खराब हो गई। और साथ में मम्मी पापा की भी इसलिए महीने की पूरी सैलरी खत्म हो चुकी थी

बाकी अगले पार्ट में


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