रिश्ते प्यार और विश्वास के 4
रिश्ते प्यार और विश्वास के 4
मधुरिमा! रवि घर छोड़कर जा रहा है। तुम ऐसा करो बच्चों को लेकर यहां आ जाओ या मैं वहां तुम्हारे पास रहने आ जाती हूं। सविता जी ने फोन पर अपनी बेटी मधुरिमा से कहा जो रवि से छोटी थी।
"लेकिन मम्मी क्या बात हो गई? जो भैया घर छोड़कर जा रहे हैं?"
" बात क्या होनी है आजकल के बच्चे बड़ों की जरा जरा सी बात का बुरा मान जाते हैं। जरा सी बात बर्दाश्त नहीं होती।" और सविता जी ने जो अब तक सारी बातें हुई, वह और कुछ अपने पास से मिलाकर मधुरिमा को बता दी। मधुरिमा को उनकी बात सुनकर बड़ा अफसोस हुआ वह बोली।
"मम्मी मैं और विभा वहीं आ रहे हैं वहीं आकर आपसे बात करेंगे।" विभा मधुरिमा से छोटी थी दोनों एक ही घर में ब्याही थी।
दो ढाई घंटे बाद ही विभा और मधुरिमा सविता जी के पास पहुंच गई।
"मम्मी भैया, भाभी और बच्चे कहां हैं?" मधुरिमा ने आते ही फिक्रमंदी से पूछा।
"सोेैम्या तो बच्चों को स्कूल से लेने गई है। और रवि अपने कमरे में होगा। यह सुनकर मधुरिमा ने चैन की सांस ली और बोली।
"मम्मी अब बताइए क्या बात है?"
"मैंने तुम्हें बताया तो था। बड़ा बेटा तो मेरा नालायक था ही छोटा भी उस से कम नहीं है। किसी ने सही कहा है बेटे शादी के बाद अपने नहीं रहते पराए हो जाते हैं। मैंने कितने अरमानों से अपने बच्चों को पाला है। और अब मेरी जरा जरा सी बात बच्चों को अखरती है। जरा सा कुछ खरीदना बच्चों को अच्छा नहीं लगता।"
और अच्छा नहीं लगता तो ना ल,गे वह घर छोड़कर जाना चाह रहा है, तो चला जाए मैं भी मजबूत हूं ।मेरे पास तो मकान है मैं जिसे भी मकान दूंगी। वह मेरी सेवा दौड़कर करेगा। मैं अपना मकान तुम दोनों बहनों के नाम कर दूंगी। तुम ही मेरी सेवा करना। अपने बेटों से तो मुझे कोई उम्मीद नहीं तुम दोनों ही मेरी आखरी उम्मीद हो।"
उनकी बात सुनकर दोनों बहनों ने एक दूसरे की तरफ देखा तब विभा बोली।
"मम्मी मेरी बात ध्यान से सुनिए । हमारे भाइयों के जीतना तो कोई लायक भी नहीं। बड़े भैया को तो चलो हम एक बार को कह देते कि वह अपने बीवी के कहने में आकर आप से अलग होकर चले गए। लेकिन आप रवि जैसे बेटे को गलत बता रही हैं। यह सरासर आपकी गलती है। मम्मी हमने देखा है आप बिना वजह जली कटी बातें सुनाती हैं। बिना वजह से झगड़ा करने की कोशिश करती हैं।
मम्मी हमने देखा है जब भी हम आते हैं भैया भाभी आपसे पूछते हैं कि आप क्या खाएंगी तब तो आप कह देती हैं। कुछ भी बना लो और बाद में कहती है कि मुझे यह नहीं खाना और वह भी नहीं खाना। भाभी आपके लिए तभी कुछ बना कर देती है या फिर बाहर से मंगा कर देती हैं। आपकी हर बात को नजरअंदाज कर देते हैं।
मम्मी मैंने देखा है, वह इतने बुरे दौर से गुजर रहे हैं लेकिन फिर भी आपकी हर जरूरत पूरी करते हैं। चाहे उनकी अपनी जरूरत पूरी हो या नही।" मधुरिमा की बात सुनकर सविता जी को गुस्सा आ गया।
" मैं तो सोच रही थी मेरी बेटियां मेरे मन की बात समझेगी । लेकिन तुम तो मेरे अंदर ही कमी निकालने लगी। कि कहीं तुम्हें मेरी सेवा करनी पड़ जाएगा। बुढ़ापे में मेरा काम ना करना पड़ जाए। और मैं कोई फ्री में तुम से काम थोड़ी ना करा रही हूं। मैं तो तुम्हें अपना मकान दे रही हूं।" सविता जी की बात सुनकर विभा चिढ़ गई और बोली।
" मम्मी मकान की धोंस आप ना ही दें तो बेहतर रहेगा। आप मकान-मकान कर रही हैं। चलो मान लिया हम आपको रख लेंगे आप मकान हमारे नाम कर देंगी। कल को मकान हमारे नाम होने के बाद आपके दामादो ने आपसे कह दिया आप यहां से जाइए। तब आप क्या कर लेंगी।
जब आपने रवि जैसे बेटे को इतना परेशान कर दिया कि वह आपसे दूर जाने की बात कर रहे हैं। तो दामाद आपको कैसे बर्दाश्त कर लेंगे। दामाद के लिए चाहे जितना भी करो वह बेटों के जितने बर्दाश्त नहीं कर पाते। और मम्मी जितने आप नखरे दिखाती हैं उतना तो कोई भी मकान या कुछ भी कितना भी दे देंगी आप उसे तब भी कोई आपकी सेवा नहीं करेगा। और आपको क्या जरूरत थी। मेले में जाकर दुनिया भर का सामान खरीदने की। अब आप कौन सा घर चलाती है।"
दोनों बहनों की बात सुनकर सविता जी भड़क गई और बोली।
" मैं तो तुम्हारे लिए ही सामान खरीद रही थी। मैं कौन सा अपने लिए कर रही थी। बताओ क्या जमाना आ गया है बेटे तो बेटे, बेटियाँ भी अपनी मां की बात नहीं समझ रही।"
बाकी अगले पार्ट में.....
