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AlifSha saifi

Drama Inspirational

4  

AlifSha saifi

Drama Inspirational

रिश्ते प्यार और विश्वास के ३

रिश्ते प्यार और विश्वास के ३

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मैंने वहां पर बड़े ही अच्छे पैडेंट देखे थे। लेकिन रवि के टोकने से वह मेरे दिमाग से निकल गए और मैं वह नहीं ले पाई। और जब रवि के पास इतने पैसे नहीं थे। कि वह हमें कुछ दिला पाए। तो हमें मेले में नहीं ले जाना चाहिए था और पैसे नहीं होने का तो सिर्फ बहाना है। यही सब समान अगर उसकी पत्नी लेती तो वह इतनी रोक-टोक नहीं करता। क्या करें पत्नी और बच्चों के आगे मां बाप और बहन भाई कुछ नहीं लगते। बस फिर तो वही अपने होते हैं।

" अरे भाग्यवान क्यों हर वक्त इन्हीं बातों का रट्टा लगाए रखती हो। कभी तो सुकून के दो पल बैठ जाया करो।" रवि जो देर रात तक जागने की वजह से सुबह उठ नहीं पाया था और उसके सर में भी दर्द था। उसकी वजह से आज ऑफिस नहीं गया था। उसने जब यह बात सुनी वह सविता जी से बोला।

"मम्मी आपने इतना सब कुछ तो खरीद लिया है। फिर क्यों बातें बनाए जा रही हैं। और रही बात मेले में ले जाने और खर्च करने की तो मैंने पहले ही मना किया था। लेकिन आप बच्चों के साथ जिद करने लगी। उन्हें समझाने से तो क्या रहीं और उन्हीं के साथ मिल गई। आपको पता है ना कोरोना की वजह से सारा संतुलन बिगड़ गया है। मेरी जो भी जमा पूंजी थी कोरोना की वजह से खर्च हो गई है। वह तो अच्छा है की मेरी नौकरी नहीं गई। नहीं तो जाने खर्च भी किस तरह होता। 

आपको सब कुछ पता है, लेकिन आप इस तरह बनती है। जैसे मेरे पास कुबेर का धन भरा हुआ है। उसे चाहे जितना खर्च करोगे खत्म ही नहीं होगा और मैं फिर भी आपको रोकने में लगा रहता हूं। आप मां होकर मेरी हालत नहीं समझ रहीं तो और कौन समझेगा। और आप बार-बार बीवी बच्चों को कहती रहती है। बताइए सौम्या और बच्चों को मैंने क्या खरीद कर दिया है। आपसे ज्यादा तो मेरे छोटे-छोटे बच्चे मेरी परेशानी समझते हैं। और मेरी इतनी कमाई नहीं है। लेकिन अपनी जरूरतों को छोड़कर मैं आपकी हर जरूरत पूरी करता हूं। लेकिन आपके फिर भी वही ताने खत्म नहीं होते की बीवी बच्चों के आगे मां-बाप की कोई वैल्यू नहीं। आपने अपने लिए और अपनी बेटियों के लिए तो सामान खरीद लिया। आपने यह भी सोचा कि सौम्या ने कुछ नहीं लिया है कुछ उसको भी पूछ लेना चाहिए। लेकिन नहीं आपने तो उसके बारे में एक बार भी नहीं सोचा और अगर आपको इस चीज का इतना ही दुख है। कि मैं बीवी बच्चों को देखता हूं। तो आपको मेरी शादी ही नहीं करनी चाहिए थी। ना मेरी शादी होती ना मैं अपने बीवी बच्चों के बारे में कुछ सोचता। बस कमाता और आपको देता रहता। क्योंकि आपने मुझे जन्म दिया है। लेकिन मम्मी अब मुझसे और नहीं सुना जाता। मैं अपने बच्चों को अलग लेकर रहना चाहता हूं।" रवि की बात सुनकर सविता जी गुस्से से बोली।

अगर तुम जाना चाहते हो तो जाओ लेकिन फिर मैं तुम्हें अपनी संपत्ति में से कुछ नहीं दूंगी।"

" ठीक है मम्मी जैसी आपकी मर्जी लेकिन अब मुझसे और ज्यादा बर्दाश्त नहीं होती।"

अब तुम खुश हो बेटे ने तुम्हारी बातों से तंग आकर घर छोड़कर जाने का फैसला कर लिया है। अगर तुम मेरी बात को पहले ही समझ जाती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता अब रहना अकेले इस घर में रवि के जाने के बाद दिनकर जी ने सविता जी से कहा।

आप क्यों फिक्र कर रहे हैं यह घर छोड़कर नहीं जाएगा और अगर घर छोड़कर चला भी गया तो एक महीने में ही घर वापस आ जाएगा। क्योंकि आजकल किराए के मकान बहुत महंगे मिलते हैं। दो-चार दिन में ही दाल आटे के भाव का पता चल जाएगा। अगर लौटकर नहीं आएगा कोई बात नही । मेरा तो मकान है मैं जिसे दूंगी वह मेरी दौड़कर खिदमत करेगा। एक जरा सा सामान क्या ले लिया। इस पर तो इतनी जोर पड़ गये पूछो मत।"

"सविता इस भूल में मत रहना, कि वह निकल कर चला गया तो कोई बात नहीं वापस भी आ जाएगा। क्योंकि वह एक बार को मकान का महंगा किराया तो दे देगा। लेकिन वहां उसे चैन सुकून होगा। वहां तुम्हारे रोज-रोज के ताने नहीं होंगे तुम्हारी जली कटी बातें नहीं सुनने को मिलेंगी। वह सुकून से रहेगा लेकिन मुसीबत हमारी आ जाएगी। क्योंकि मुझे भी रिटायर हुए जमाना हो गया है। और तुम्हारा हाथ इतना खुला हुआ है। जो मैंने कमाया था वह तुमने कुछ भी नहीं जोड़ा। संभल जाओ बेटे को बाहर मत निकलने दो। उसे यहीं रोक लो, क्योंकि उसकी इतनी सैलरी भी नहीं है। फिर भी वह हमारी सारी जरूरतें पूरी करता है। और वह सारी जिंदगी इतना ही नहीं कमाएगा बल्कि आगे भी बढ़ेगा। क्योंकि सारी जिंदगी वक्त एक सा नहीं रहता।

बाकी अगले पार्ट में.....


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