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yogita singh

Abstract


3.1  

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उस एक रात

उस एक रात

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जैसे ही घर का दरवाजा खुलता है ... सामने खून से लतपथ करुणा पड़ी दिखती है ।  इतना खून देख के रती की चीख निकल जाती है , वो डर और आचार्य के मिश्रित भाव को मुख पर रख कर डरते हुए करुणा के पास जाती है । 

रती एक एक कदम आहिस्ता आहिस्ता बढ़ाती है .. जैसे ही वह करुणा के पास पहुंचती करुणा की आंखे अचानक से खुल जाती है मरी हुई करुणा की खुली आंखे देख के रती के होश उड़ जाते है।

वो जोर से चीखती है ..... "मैंने कुछ नहीं किया , मुझे माफ़ कर दो,मैंने कुछ नहीं किया।" तभी अचानक से सभी दरवाजे खुद बखूद खुलने बंद होने लगते है । खिड़कियों से पर्दे उड़ने लगते है जंगली जानवरो के रोने की आवाजे सुनाई देने लगती है । अचानक से बिजली गुल हो जाती है ।इस असाधारण असामान्य गतिविधि डरावने दृश्य को देख कर वह डर जाती है। यह बिल्कुल वैसा ही हो रहा था जैसा उसने भूत की कहानियां सुनी थी

इतना डरावना माहौल देख कर रती एक कोने में डरी सहमी खड़ी है । डरते हुए वो रसोई की तरफ बढ़ती है ताकि मोमत्तियां जला सके । तभी अचानक से उसे ऐसा लगता है किसी ने उसके पैरो को कस के पकड़ लिया है । वो जोर से चीखती है और अपने पैरो को जोर से झटकते हुए एक कमरे की तरफ भागती है । पर सामने रखे टेबल से भिड़ कर वो गिर पड़ती है। तभी सामने के कोई मोमबत्ती लिए आता दिखता है जब वो नजदीक आता है तो रती के होश उड़ जाते है । वो करुणा को अपने सामने खड़े देख के डर जाती है । खून से लथपथ करुणा धीरे - धीरे रती के नजदीक आती है । चारो ओर से भयानक आवाजे आती , हवाएं बहुत वेग से चलती है ।

रती की सांसे अटक जाती है । रती सीढ़ियों की तरफ भागती है पर उस महसूस होता है कि उसे पैर में चोट लगा है जिसके कारण उसके पैर नहीं उठ रहे ..डर के मारे वो खूब जोर जोर से चिल्लाती है, मुझे छोड़ दो मैंने कुछ नहीं किया मुझे जाने दो , मुझे माफ़ कर दो , और वो बेहोश हो जाती है ।

तभी करुणा जोर से चिल्लाती है .. "दीदी डर गई , दीदी डर गई ।" तभी बिजली आ जाती है । पर रती डर के मारे बेहोश हो चुकी है । करुणा उसे होश में लाने की बहुत कोशिश करती है पर कोई फायदा नहीं होता

अन्ततः करुणा डॉक्टर को फोन करती है । डॉक्टर के आने पर रती का इलाज होता है । रती होश में तो आती है पर अब उसका मानसिक संतुलन खो चुका है ...।


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