Shilpi Krishna

Abstract Inspirational Others


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सुसाइड क्यूँ ?

सुसाइड क्यूँ ?

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सुसाइड क्यूँ ???

क्यूँ हमें जिंदगी से प्यारी मौत लगने लगती है ?

क्यूँ हमें सुसाइड करने से पहले किसी का मोह नहीं रहता ?

क्या सुसाइड करने से सारी समस्या हल हो जाती है ?

सुसाइड करने के ख्याल से अपना बचाव कैसे करें ?

आज मैं इसी टॉपिक को लिखने वाली हूं।  

सुशांत सिहं राजपूत की मौत ने सबको हैरत में डाल दिया है, लेकिन उन्होंने सुसाइड किया था या उनका मर्डर हुआ है, इस बात की जांच चल रही है, इसलिए उसके बारे में कुछ भी कहना अभी जल्दीबाजी होगी।  

कभी - कभी जिंदगी उस मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जब हमें जीने से अच्छा मर जाना लगता है।

जब लगता है की नहीं अब और नहीं बर्दाश्त कर सकतें हम 

जब हर एक चीज से घृणा होने लगती है, किसी से मिलने का, बात करने का मन नहीं करता 

जब हमें सबके असली चेहरे नजर आने लगतें है 

जब हमें धोखा मिलता है चाहे वों प्यार हो, दोस्ती हो या कोई भी घनिष्ठ रिश्ता हो 

जब हम सबको आजमा कर देख चुके रहते है, और बिल्कुल अकेले पड़ जाते है 

तब मन के किसी एक कोने में जरूर सुसाइड का ख्याल आता है, वों ख्याल अभी बहुत छोटा होता है एक - दो सेकेंड का, लेकिन अगर आपने अपने मन को मजबूत कर उस ख्याल को दिलों - दिमाग से निकाला नहीं तो, वों ख्याल धीरे - धीरे आपके ब्रेन को अपने कब्जे में ले लेता है, और आप कब खुद को नुकसान पहुंचाने की सोचने लगते है, आपको पता भी नहीं चलता


1 : क्यूँ हमें जिंदगी से प्यारी मौत लगने लगती है ? 

मेरा मानना है की जरूरी नहीं की डिप्रेशन की वजह से हमें सुसाइड का ख्याल आयें, आप अगर गौर करेंगे तो पता चलेगा की जब हम गुस्से या तनाव में रहते है तो हमें 24 घंटों में एक बार जरूर सुसाइड का ख्याल आता है और जब वों ख्याल आता है तो हम कुछ सेकेंड या मिनट तक उसके बारे में सोचने लगते है, वहीं अगर हम खुश रहते है तों, अगर सुसाइड का ख्याल भी आयें तो हम अपना दिमाग वहां से हटा लेते है।

पुरुषों को सुसाइड का ख्याल महिलाओं की अपेक्षा कम आता है, लेकिन पुरुष सुसाइड करने के मामले में महिलाओं से आगे हैं।

कभी - कभी हम अपनी जिंदगी से ज्यादा अहमियत किसी इंसान या फिर किसी वजह को दे देंते है, फिर हम जब उससे डिसअपवाइंट होते है तो फिर बरबस ही मन में सुसाइड का ख्याल चलने लगता है हमें लगता है की उस के बगैर हमारी जिंदगी में कुछ नहीं बचा।


बिजनेस में लॉस हो या आप कर्जे से लदे हो और इससे निकलने की कोई राह नजर ना आ रही हो तो भी हमें यही सब ख्याल आता है।

आजकल यूथ जनरेशन स्ट्रगल नहीं करना चाहती, और उनमें सब्र नाम की कोई चीज भी नहीं है, वों कुछ भी तुरंत पाना चाहते है, लेकिन जिंदगी माता - पिता नहीं होती, जो हर चीज इच्छानुसार मौजूद कर दे, कभी - कभी इन्हीं से बातों से घबरा कर यूथ सुसाइड जैसा अटेंप्ट कर लेते है।


महिलाएं घरेलू हिंसा और मानसिक दबाव की वजह से उन्हें जिंदगी से प्यारी मौत लगने लगती है।

कभी - कभी लंबी बीमारी, घर के क्लेश, और कुछ भी मन मुताबिक ना होने की वजह भी सुसाइड का कारण बन जाती है।

और भी बहुत से विभिन्न प्रकार के कारण है, सबका उल्लेख करना संभव नहीं है।


2 : क्यूँ सुसाइड करने से पहले हमें किसी का मोह नहीं रहता ? 

सुसाइड करने का निर्णय लेने वाला इंसान धीरे - धीरे अपने आप को सबसे अलग करता जाता 

है, सुसाइड करने का फैसला एक पल में नहीं होता है, जब किसी इंसान को अपनी जिंदगी बोझ लगने लगती है, उसे कहीं से कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आती, वों जिंदगी में कुछ नया ट्राई ही नहीं करना चाहता है, तो बस उसे एक ही रास्ता दिखाई देता है, जो उसे सुसाइड की तरफ ले जाता है। सुसाइड करने वाले को हर इंसान से भरोसा उठ चुका रहता है, उन्हें कहीं से भी थोड़ी सी भी मदद की उम्मीद नहीं होती, इसलिये वों सब इंसानों से घृणा करने लगता है, और उसे किसी का मोह नहीं रहता।


3:क्या सुसाइड करने से सारी समस्या हल हो जाती है ? 

सुसाइड करने से समस्या खत्म हो जायेगी ऐसा सोचना बेवकूफी है, सुसाइड करने से खत्म इंसान होता है, समस्या तो जस की तस रहती है, बल्कि उस समस्या का सामना आपके प्रियजनों को करना पड़ता है, देखा जाएं तो उन्हें तीन तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ता है , पहली तो वों आपके उन्हें छोड़ कर सुसाइड करने के गम से गमगीन रहते है, दूसरा जो आप सुसाइड करके उनके लिये अपनी समस्या छोड़ गये हो, उनसे भी उन्हीं को जूझना है, और तीसरी चुनौती की उनकी खुद की लाइफ में भी कोई ना कोई प्रॉब्लम होगी ही, जिससे वों रोज जूझते होंगे, इन सब के बावजूद उन्हें आपकी भी समस्या का हल निकालना है, जो आप सुसाइड करके उनके लिये छोड़ गये हो।  

सुसाइड करना अब तो कानूनन जुर्म भी है।

सुसाइड करने के ख्याल से अपना बचाव कैसे करें ?

अब आते है इस मोस्ट इम्पोर्टैंट टॉपिक पर 

कुछ तरीकों को अपना कर आप अपना बचाव कर सकते है।

1 : सबसे पहले तो आप धार्मिक हो जाएं, धार्मिक होने से मेरा मतलब ये नहीं की आप सारा काम - काज छोड़कर 24घंटे पूजा पाठ करें, धार्मिक होने से मेरा मतलब है की आप अपने ईस्ट देव में अपनी श्रध्दा और भी गहरी करें, आप को कोई दुख तकलीफ हो आप अपने इष्टदेव से ऐसे शेयर करें जैसे की वों आपके बेस्ट फ्रेंड हो और आपके सामने बैठ कर आपकी समस्या सुन रहे हों, यकीन मानिए ये तरीका भले ही थोड़ा सा इलोजीकल लगें ,पर इससे बेस्ट कोई तरीका हों ही नहीं सकता, ये तरीका मेरा खुद का आजमाया हुआ है, इसमें दो फायदे है, पहली बात तो ऐसा करने से आपको सुकून महसूस होगा, और दूसरी बात की कभी - कभी ऐसी बातें भी होती है लाइफ में जो हम किसी से शेयर नहीं करना चाहते है, और अगर शेयर कर भी ले उसके लीक होने का खतरा बराबर लगा रहता है।

पहली बार ये उपाय करने से आपको थोड़ी दिक्कत होगी, और अगर आप ऐसा नहीं कर पा रहे है और आपका ध्यान भटक जा रहा है तो मैं यहीं सलाह दूंगी की आप अपने इष्टदेव की तस्वीर या मूर्ति से बात करके काम चला सकतें है , जब धीरे - धीरे आपको आदत पड़ जाएगी तो आपकों ऐसा महसूस होगा की वाकई में आपके इष्टदेव आपके सामने बैठे है और आप उन्हें अपनी समस्या सुना रहे है। और बहुत जल्द आपकी सारी समस्या धीरे - धीरे खत्म होने लगेगी, चाहे वों कितनी ही बड़ी क्यूं ना हों., यकीं मानिए ऐसा मेरे साथ हों चुका है।  

2 :आप हर चीज को पॉजिटिव वे में ले, समस्या कितनी भी बड़ी क्यूं ना हों, आपकी जिंदगी से बड़ी नहीं हों सकती, ऐसा सोचें और अपनी जिंदगी को खुल कर जिएं, समाज की परवाह किये बगैर।


3 : आलसी बन जाएं, जी हां मैं आपको आलसी बनने की सलाह दें रही हूं, जैसा की एक आलसी इंसान अपने काम को हमेशा कल पर टालते रहता है, उसी तरह आपको भी सुसाइड करने का ख्याल आए तो उसे कल पर टाल दें, ऐसा रोज करें जब तक वों ख्याल खुद ही मायूस होकर कहीं चला ना जाऐं।

4 : अपनी लाइफ में एक ऐसा इंसान जरूर रखे जिसको देख कर आप सुसाइड करने का ख्याल छोड़ सके, वों इंसान आपका लाइफ पार्टनर हों सकता है, आपका क्रश हों सकता है या आपका कोई रिलेटिव जैसे की भाई बहन, मां बाप, कोई दोस्त जिसे देखकर आपको जीने का मन करें।

5 : अपनी लाइफ का कोई ऐसा लक्ष्य बनाएं, जिसको अचीव करने के लिये आपको जिंदा रहना जरूरी लगें।

6 : सबसे मिले जुले लेकिन किसी को भी अपने ऊपर हावी ना होने दे, किसी को देख कर उसके जैसा बनने की ना सोचें, अपना एक अलग मुकाम बनाएं 

7 : किसी से भी अपनी तुलना ना करें, अपने आप को सर्वश्रेष्ठ समझें, ऐसा सोचने से आपका मनोबल ऊंचा होगा।

8 : किताब पढ़ने की आदत डाले कभी - कभी किताबों में ही सारी समस्या का हल मिल जाता है, और आप बेहतर तरीके से जी सकतें है।


ऐसे ही कई छोटे - छोटे उपायों को अपना कर आप सुसाइड जैसी बड़ी समस्या का हल निकाल सकतें है।  



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