कुमार संदीप

Inspirational


3.1  

कुमार संदीप

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सपने

सपने

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संजीत चौदह वर्ष का था तो उसके पिता जी का स्वर्गवास हो गया। घर में सबसे छोटा था संजीत। माँ को संभालना व ख़ुद को भी संभालना एक चुनौती बन गई थी उसके लिए। पर, उसके दोनों भाई कभी भी पिता की कमी महसूस नहीं होने देते थे। आर्थिक स्थिति अनुकूल नहीं थी, फिर भी परिवार में सभी सदस्यों को ख़ुश रखने का भरसक प्रयास करते थे संजीत के दोनों भाई। छोटे भाई संजीत को लेकर दोनों भाईयों की आँखों में अनगिनत सपने थे। 

पिता जी के गुजर जाने के पश्चात नवीन व प्रवीण की पढ़ाई तो रुक गई थी पर उन दोनों ने अपने छोटे भाई संजीत को पढ़ाने का प्रण लिया था। उनका सपना था कि मेरा छोटा भाई एक दिन कुछ अच्छा करे व एक अच्छा इंसान बनें। इसलिए वे दोनों भाई दिन-रात कड़ी मेहनत भी करते थे। कठिनाईयां तो कई आईं थीं जीवन में पर तीनों भाईयों ने रुकने की न ठानी थी। 

समय गुजरता गया। कुछ दिनों के पश्चात कड़ी मेहनत,लगन व भाईयों के सहयोग से संजीत ने बिहार बोर्ड के दसवीं के परिणाम में उच्च अंक हासिल की। दोनों भाईयों,माँ व संजीत के ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। संजीत ने आगे और कड़ी मेहनत और लगन से पढ़ने का प्रण लिया। पिता और भाईयों के सपने को पूर्ण जो करना था उसे।

जब कभी संजीत भाईयों को काम पर से लौटकर घर आते देखता तो संजीत की आँखें नम हो जाती थीं। भाईयों को पसीने से लटपट देख उसका दिल धड़कने लगता था। मन ही मन संजीत सोचने लगता था कि मैं ईश्वर को शुक्रगुज़ार हूँ कि ईश्वर ने हमें इतने प्यारे और अनमोल भाई दिए हैं। मेरे लिए भईया तन पर कितना कष्ट सहन करते हैं मैं एक दिन कड़ी मेहनत की बदौलत परिवार की आर्थिक स्थिति ज़रूर सही करूंगा और भईया और पापा के सपने को पूरा करूंगा।

संजीत निरंतर कड़ी मेहनत करता था। समय गुजरता गया संजीत की कड़ी मेहनत और उसके भाईयों की दुआओं ने रंग लाया। बैंकिंग विभाग में नौकरी लग गई घर के छोटे बेटे को। संजीत का मन हर्ष से भर गया। ख़ुशी के आंसू संजीत,माँ और संजीत के भाईयों की आँखों से बहने लगे। अगले ही महीने दूसरे शहर ड्यूटी पर जाना था संजीत को। जाने से पूर्व भाईयों के मन में एक अज़ब बेचैनी थी। पता नहीं, मेरी आँखों का तारा मेरा छोटा भाई कैसे रहेगा शहर में? और भी कई प्रश्न परिवार के हर सदस्य के मन में हिलोरे मार रहे थे। 

संजीत ने अपनी माँ व दोनों भाईयों को तसल्ली देते हुए कहा, "आपलोग चिंता मत कीजिए, इस दिन का इंतजार हमें कब से था। मेरे सपने को पूर्ण करने के लिए भईया आपने बहुत मेहनत की है और माँ ने ईश्वर से कितनी बार मिन्नतें माँगी हैं। मैं सबकुछ संभाल लूंगा वहां। बस आशीर्वाद दीजिए, मैं जहां भी रहूंगा आपलोगों की यादें मेरे साथ रहेगी। मैं अब पूरा प्रयास करूंगा कि परिवार में ख़ुशियाँ खिली रहे। पापा का सपना था कि उनका बेटा एक दिन कुछ अच्छा करे, आज पापा जहाँ कहीं भी होंगे उनको तसल्ली मिल रही होगी। अगले ही दिन संजीत परिवार के हर सदस्यों को चरणस्पर्श कर ड्यूटी पर चला गया और जाते-जाते कह गया " माँ आप चिंता मत कीजिएगा आपका लाल जहां भी रहेगा ख़ुश रहेगा अपना ख़्याल रखियेगा, और भईया आप भी अपना ख़्याल रखियेगा। आपका और पापा का सपना पूर्ण हो गया भईया। 


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