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Gulafshan Neyaz

Drama

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Gulafshan Neyaz

Drama

संस्कार

संस्कार

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नेहा जल्दी तैयार हो जा। जाने मे देर हो रही है। क्या बात है मम्मी आपको बहुत जल्दी है चाची के बहु को देखने की आखिर हो क्यों ना सुभाष भैया दुबई की गोरी मेम जो लाए है।

नेहा जल्दी करो बेटा देर हो रही है हम उनके रीसेपसन मे भी नहीं गए तुम्हारे एग्जाम के चक्कर मै अब तुम क्या चाहती हो की अब भी ना जाए बेटा वो तुम्हारे तआया और चाची है सुभाष तुम्हारा भाई है वोके मम्मी अब प्लीज लम्बा लेक्चर मत दीजिये समझ गई मै वैसे मम्मी चाची तो हमारे पहनावा और खान पान को लेकर बहुत कुछ कहती है ज़ब देखो तुम लोग पिज़्ज़ा बरगर खाते हो बेटा हेल्थी खासुभाष भैया ने तो चाची की बोलती ही बंद कर दि अब खुद की बहु ही पिज़्ज़ा खाती होगीं और मिन्नी स्कर्ट पहनती होगीं अब तो चाची की बोलती ही बंद हो गई होगीं अब मै सुकून से उनके घर जा सकती हूँ अब मुझे क्या लेक्चर देगी खुद की बहु तो मुझ से भी दो कदम आगे होगीं

अब नेहा चलो भी बहुत हो गई तुम्हारी बकवास तुम्हारे पापा चिल्ला रहे है।

नेहा के पापा दो भाइ थे रमेश और सुरेश नेहा के चाचा रमेश का बेटा दुबई मे जॉब करता था। वंही उसे एक लड़की से प्यार हो गया जो उसी के साथ उसी कंपनी मे काम करती थी लड़की की पैदाइश इंडिया की थी पर उसके माँ बाप दुबई मे ही बस गये। सुभाष ने माता पिता को दुबई बुलाया और शादी कर ली। शादी के बाद वो अपनी पत्नी सनग इंडिया आया था। नेहा के मम्मी पापा और नेहा सब नई बहु से मिलने जा रहे थे। नेहा थोड़ा बेबाक टाइप थी उसे सूट सलवार और साडी ऐ सब गवार पन की निशानी लगती उसे फ़ास्ट फ़ूड खाना पसंद था देर रात दोस्तों संग पार्टी। वो फिल्मो की रंगीन दुनिया को हकीकत मे जीना पसंद करती।

मगर उसकी चाची कलावती को या सब पसंद नहीं था इसलिए वो अक्सर नेहा को कुछ सुना देती। और नेहा चिढ़ जाती और वो अपने चाची चाचा के यहाँ कम ही जाती और जाती भी तो चाहती के चाची से कम ही सामना हो।ज़ब से सुना था की सुभाष भैया ने दुबई मे लिज़ा से शादी की थी तो वो कुछ जायदा ही खुश थी पर उसका फाइनल ईयर का एग्जाम चल रइसलिए नेहा को जाने का मौका नहीं मिला अब फाइनली नेहा अपने चाची के बहु को देखने जा रही थी। बड़ा चाची भारतीय संस्कारो की बात करती हैं। उनकी पुराने ज़माने की बात सुनकर तो मेरा खून ही खौल जाता हैअब लाये ना सुभाष भैया ने मॉडर्न बहु तो अब चाची कैसे किसी को संस्करो की पाठशाला पढायेगी। वो मन ही मन सोच कर मुस्कुरा रही थी। आखिर देर घंटे की सफर के बाद वो लोग दिल्ली पहुँच ही गये। नेहा चाची के पावो छू कर आशीर्वाद लो तो नेहा ने माँ की तरफ देखा तो माँ ने घूर कर देखा तो ना चाहते होइ भी नेहा ने चाचा और चाची के पाऊ छोए खुश रहो बेटा रमेश और कलावती ने मुश्कुराते होय आशीर्वाद दिया। अरे सुभाष भैया अब तो शादी के बाद हमें भूल ही गए अरे नहीं ऐसा कुछ भी नहीं हैं मय स्वीट सिस्टर नेहा और उसकी मम्मी और चाची एक तरफ सोफे पर बैठे होइ थे तभी लिज़ा अपने हाथों मे चाय की ट्रे लेकर आई मम्मी जि चाय और नेहा के मम्मी का पावो छूवा तो नेहा की आँखे फटी की फटी रह गई। लिज़ा ने लाल साड़ी। हाथ मे लाल चूड़ा और हतेली मे मेहंदी मांग मे सिन्दूर गले मे मंगल सूत्र पहना होवा था।

अरे वाह ऐ हलवा तो बहुत स्वादिष्ट हैं नेहा के पापा ने कहा तो कलवाती मुश्कुराते होये बोली बहू ने बनाया हैं तो नेहा के पापा ने लिज़ा को अपने पास बुलाया और कहा बेटा तुम्हारे रसोई का पहला कुछ खा रहा हूँ सगुन तो बनता हैं तो लिज़ा मुस्कुरा दी रमेश ने एक लिफाफा लिज़ा को दिया तो लिज़ा आशीर्वाद लेने के लिए छूकी ई सब देख नेहा को बड़ा आश्चर्य हो रहशाम को नेहा लिज़ा के कमरे मे गई। अरे नेहा आओ बैठो वाह भाभी रूम का डेकोरेशन तो काफी अच्छा हैं लिज़ा धीरे से मुस्कराते होए बोली थैंक्स। भाभी मुझे तो लगा आप मुझे जीन्स टॉप या स्कॉर्ट मे दिखेंगी। आप तो पूरी सीरियल वाली बहु लग रही हैं लगता हैं चाची जी के डर से आपने ऐ सब किया हैतो लिज़ा धीरे से मुस्कुराते होए बोली बिलकुल नहीं मुझे हुन्दुस्तानी संस्कृति पसंद हैं। भले ही मै विदेश मै पली बढ़ी हूँ। मगर मेरा दिल हिंदुस्तानी हैं। भाभी मुझ से ई सब नहीं होगा ऐ साड़ी मगलसूत्र चूड़ा एक बोझ हैं। नहीं नेहा ई सब बोझ नहीं हमारी संस्कृति हैं। ऐ एक दुल्हन का सिंगार हैं जो उसकी खूबसूरती मे चार चाँद लगाता हैं। इस को बोझ नहीं किसी के प्यार का एहसास हैं ये मंगलसूत्र ऐ साडी। यहीं सब तो हमें इंडियान होने का गर्व महसूस करता हैं। ये हिंदी भाषा ये संस्कृति सब कुछ निराला हैं इंडिया का ज़ब हम इसकी कद्र नहीं करेंगे तो दूसरे देश के लोग कैसे करेंगे। ऐ लाल जोड़ा मुझे तुम्हारे भैया की प्यार की एहसास दिलाती हैं मुझे अच्छा लगता हैं मेरी माँ मुझे भले विदेश मे पाला हैं पर संस्कार हिंदुस्तानी दिया हैं आई लव इंडिया।


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