समग्रता में विविधता
समग्रता में विविधता
दो योद्धा अलग-अलग दिशाओं से एक वृक्ष के समीप पहुँचते हैं, जहां पर एक ढाल टंगी होती है, दोनों ढाल के आकार और बनावट की प्रशंसा करते हैं। एक कहता है , 'यह लाल रंग की ढाल अति उत्तम है'। दूसरा कहता है, 'नि:संदेह यह अति उत्तम है, किन्तु यह हरे रंग की है, लाल नहीं।
वे इस तुच्छ मुद्दे पर झगड़ा करना प्रारंभ कर देते हैं और दोनों के बीच भीषण लड़ाई शुरू हो जाती है। अपनी तलवारों से वह एक दूसरे को घायल कर देते हैं और सड़क पर गिर पड़ते हैं। कुछ समय पश्चात एक साधु वहां से गुजरता है। उन दोनों व्यक्तियों से झगड़े का कारण जानने के बाद वह व्याख्या करता है -- "तुम दोनों सही हो। ढाल एक ओर से हरे रंग की तथा दूसरे ओर से लाल रंग की है, तुमने इसे अलग-अलग नजरिए से देखा और इसी कारण गलतफहमी पैदा हो गई।" ऐसा ही धर्म के साथ भी होता है। हमारे विचार, हमारा दृष्टिकोण, हमारा प्रशिक्षण और परवरिश, धर्म के प्रति हमारा नजरिया बनाता है और हम यह सोचते हैं कि केवल हमारा ही धर्म सही है, महान है, दूसरे धर्म ऐसे नहीं हैं।
हम भूल जाते हैं, कि समस्त धर्मों में अच्छी बातें हैं और वे सत्य को ही किसी ना किसी रूप में आगे ले जा रहे हैं। अतः समस्त धर्मों को आपस में सहयोगी बनकर सत्य के अधिकतम पहलुओं को देखना चाहिए और हमें इन सभी को बिना किसी एक की आलोचना किए स्वीकार करना चाहिए एवं सम्मान देना चाहिए।
