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Ankit Mishra

Children Stories Fantasy Inspirational

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Ankit Mishra

Children Stories Fantasy Inspirational

वो राजा जिसने बेटियों को दी अभिव्यक्ति की पूरी आज़ादी

वो राजा जिसने बेटियों को दी अभिव्यक्ति की पूरी आज़ादी

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बात है त्रेतायुग की। एक राजा था, बड़ा ही फेमिनिस्ट ! उन की कोई संतान न थी। एक बार कहीं अनाथ बच्ची मिली, तो बिना किसी संकोच के झट से उसे अपना लिया। जिस ज़माने में राजा पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया करते थे और गोद लेते तो भी किसी लड़के को, ऐसे में उस राजा ने लड़की को गोद लिया था। वह इस बात पर यकीन नहीं रखता था की बेटे ही वंश आगे बढ़ाते हैं। बाद में राजा-रानी के यहाँ एक बेटी ने भी जन्म लिया। बिना किसी भेदभाव के राजा ने दोनो बेटियों को बड़ा किया। जब बेटी की शादी की बात आई, तो उन्होंने ऐसे वर की तलाश की, जिसकी काबिलियत उनकी बेटी से कम न हो। यहाँ तक कि उसके लिए भव्य स्वयंवर करवाया और उसे मनचाहा वर चुनने का अवसर भी दिया।

वह राजा और कोई नहीं, भगवान राम की पत्नी सीता के पिता राजा जनक थे, जिनके नाम पर सीता को जानकी भी कहा जाता है। अपनी बेटियों को उन्होंने ऐसे वातावरण में पाला, जहाँ उनके दरबार में अध्यात्मिक सम्मेलन आयोजित होते थे, बौधिक बहसें होती थीं। ऐसा वातावरण, जहाँ उन्हें शिक्षा प्राप्त करने, अपना ज्ञान और पसंद-नापसंद को अभिव्यक्त करने की पूरी आज़ादी थी। 

जहाँ उनके अपने विचार और अपनी इच्छाएं थी, जो स्वीकार्य थी। इस तरह राजा जनक के लिए कहा जा सकता है की वे वास्तव में नारीवादी थे। उन्होंने कभी बेटियों को सबके सामने अपनी राय रखने से नहीं रोका। हमेशा नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित किया। एक राजा होने पर भी युद्ध में हुई जीत से ज़्यादा उत्सव उन्होंने अपनी बेटियों के प्रयासों की सफलता का मनाया। ऐसे आधर्श पिता को शत् शत् नमन।


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