शीर्षक - आज की नारी.....मन
शीर्षक - आज की नारी.....मन
आज की नारी आधुनिक समय और मन की सोच के साथ चल रही है। सच तो नारी के साथ पुरुष संग साथ तो निभाते हैं। परन्तु, आज पुरुष का पौरुष खो गया है। सच कड़वा होता है परन्तु राह सही दिखाता है। आज और पिछले 20 वर्षों का इतिहास हम सोच समझ सकते हैं।
आज आधुनिक समय में हम कलयुग के नाम को कल पुर्जे और मशीन क्रांति का समय न मानकर कलयुग की परिभाषा को बदल दिया है। आज कलयुग में हम सबने शारीरिक संबंध और धन के साथ अपने बल को सहयोग करना इस कलयुग में पहचान बनाने की राह खोजीं हैं।
आज की नारी अपने मन और सोच से नयी राह बना रहीं हैं तब दूसरी ओर नारी शक्ति का सच पुरुष के पौरुष बल की हंसी बना रहा हैं। सच से हम अपने अंतर्मन में सोच कर इस लघुकथा में सच शब्दों में नीरज को सहयोग कर सकते हैं।
आधुनिक आज की नारी शिक्षा के साथ उड़ान भर रही है कहीं अशिक्षित तब छल फरेब और स्वार्थ के साथ रंगमंच पर अपराध की राह चल रही है। हम सब सच के साथ अंतरात्मा से सच की राह चुने तब नारी अब पुरुष के पौरुष को नककार रहीं हैं वह अपनी सोच और मन की राह चल रही हैं।
संस्कार और संस्कृति परम्पराएं सब भूलकर नये समय के साथ सोच बदल रहीं हैं। आधुनिक समय में आज की नारी मन के साथ बदल रहीं हैं।
सच तो और बहुत बाकी है बस पाठकों से प्रतिक्रिया का अनुरोध है।
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नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश
