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Aman kumar

Action Fantasy Others

4  

Aman kumar

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सच्ची वीरता

सच्ची वीरता

5 mins
4

 वीर पुरुष धीर, गम्भीर और आजाद होते हैं. उनके मन की गम्भीरता और शक्ति समुद्र की तरह विशाल और गहरी तथा आकाश की तरह स्थिर और अचल होती है, परन्तु जब ये शेर गरजते हैं तब सदियों तक उनकी दहाड सुनायी देती रहती है और अन्य सब आवाजें बन्द हो जाती है. एक बार एक बागी गुलाम और एक बादशाह के बीच बातचीत हुई. यह गुलाम कैदी दिल से आजाद था. बादशाह ने कहा, मैं तुमको अभी जान से मार डालूँगा. तुम क्या कर सकते हो? गुलाम बोला' हाँ' मैं फाँसी पर तो चढ जाऊँगा, पर तुम्हारा तिरस्कार तब भी कर सकता हूँ. इस गुलाम ने दुनिया के बादशाहों के बल की हद दिखला दी. बस इतने ही जोर और इतनी ही शेखी पर ये झूठे राजा मारपीट कर कायर लोगों को डराते हैं. चूँकि लोग शरीर को अपने जीवन का केन्द्र समझते हैं इसलिए जहाँ किसी ने इनके शरीर पर जरा जोर से हाथ लगाया वहीं वे मारे डर के अधमरे हो जाते हैं. केवल शरीर- रक्षा के निमित्त ये लोग इन राजाओं की ऊपरी मन से पूजा करते हैं. सच्चे वीर अपने प्रेम के जोर से लोगों के दिलों को सदा के लिए बाँध देते हैं. फौज, तोप, बन्दूक आदि के बिना ही वे शहंशाह होते हैं. मंसूर ने अपनी मौज में आकर कहा कि मैं खुदा हूँ. दुनियावी बादशाह ने कहा' यह काफिर है' मगर मंसूर ने अपने कलाम को बन्द न किया. पत्थर मार- मारकर दुनिया ने उसके शरीर की बुरी दशा की परन्तु उस मर्द के मुँह से हर बार यही शब्द निकला' अनलहक' (अहं ब्रह्मास्मि) में ही ब्रह्म हूँ. मंसूर का सूली पर चढना उसके लिए सिर्फ खेल था. महाराजा रणजीत सिंह ने फौज से कहा अटक के पार जाओ. अटक चढी हुई थी और भयंकर लहरें उठी हुई थीं. जब फौज ने कुछ उत्साह प्रकट न किया तब उस वीर को जोश आया. महाराजा ने अपना घोडा दरिया में डाल दिया. कहा जाता है कि अटक सूख गयी और सब पार निकल गये. लाखों आदमी मरने- मारने को तैयार हो रहे हैं. गोलियाँ धुआँधार बरस रही हैं. आल्प्स के पहाडों पर फौज ने चढना ज्यों ही असम्भव समझा त्यों ही वीर नेपोलियन को जोश आया और उसने कहा, आल्प्स है ही नहीं' फौज को निश्चय हो गया कि आल्प्स नहीं है और सब लोग पहाड के पार हो गये. एक भेड चराने वाली और सत्त्वगुण में डूबी हुई युवती कन्या के दिल में जोश आते ही फ्रांस एक शिकस्त से बच गया. वीरता की अभिव्यक्ति कई प्रकार से होती है. कभी उसकी अभिव्यक्ति लडने मरने में, खून बहाने में, तलवार तोप के सामने जान गंवाने में होती है तो कभी जीवन के गूढ तत्त्व और सत्य की तलाश में बुद्ध जैसे राजा विरक्त होकर वीर हो जाते हैं. वीरता एक प्रकार की अन्तः प्रेरणा है. जब कभी इसका विकास हुआ तभी एक नया कमाल नजर आया. एक नयी रौनक, एक नया रंग, एक नयी बहार, एक नयी प्रभुता संसार में छा गयी. वीरता हमेशा निराली और नयी होती है. नयापन भी वीरता का एक खास रंग है. वीरता देश- काल के अनुसार संसार में जब कभी प्रकट हुई तभी एक नया स्वरूप लेकर आयी, जिसके दर्शन करते ही सब लोग चकित हो गये. वीर पुरुप का दिल सबका दिल हो जाता है. उसका मन सबका मन हो जाता है. उसके विचार सबके विचार हो जाते हैं. उसके संकल्प सबके संकल्प हो जाते हैं. उसका बल सबका बल हो जाता है. वह सबका और सब उसके हो जाते हैं. वीरों को बनाने के कारखाने कायम नहीं हो सकते. ये तो देवदार के वृक्षों की तरह जीवन के अरण्य में खुद ब खुद पैदा होते हैं और बिना किसी के पानी दिये, बिना किसी के दूध पिलाये, बिना किसी के हाथ लगाये तैयार होते हैं और दुनिया के मैदान में अचानक ही सामने आकर ये खडे हो जाते हैं. हर बार दिखावा और नाम के लिए छाती ठोंककर आगे बढना और फिर पीछे हटना पहले दर्जे की बुजदिली है. वीर तो यह समझता है कि मनुष्य का जीवन जरा- सी चीज है. वह सिर्फ एक बार के लिए काफी है. बन्दूक में केवल एक गोली है. उसे एक बार ही प्रयोग किया जा सकता है. हाँ. कायर पुरुष इसको बडा ही कीमती और कभी न टूटने वाला हथियार समझते हैं. हर पडी आगे बढकर और यह दिखाकर कि हम बडे हैं, वे फिर पीछे इसलिए हट जाते हैं कि उनका मनोबल (जीवन) किसी और अधिक बडे काम के लिए बच जाय. गरजने वाले बादल ऐसे ही चले जाते हैं, परन्तु बरसने वाले बादल जरा- सी देर में मूसलाधार वर्षा कर जाते हैं. वीर पुरुष का शरीर कुदरत की समस्त ताकतों का भंडार है. कुदरत का यह केन्द्र हिल नहीं सकता. सूर्य का चक्कर हिल जाये तो हिल जाये परन्तु वीर के दिल में जो देवी केन्द्र है, वह अचल है. कुदरत की नीति चाहे विकसित होकर अपने बल को नष्ट करने की ही मगर वीरों की नीति, बल को हर तरह से इकट्ठा करने और बढाने की होती है. वह वीर क्या, जो टीन के बर्तन की तरह झट से गर्म और ठंडा हो जाता है. सदियों नीचे आग जलती हो तो भी शायद ही गर्म हो और हजारों वर्ष बर्फ उस पर जमती रहे तो भी क्या मजाल जो उसकी वाणी तक ठंडी हो. उसे खुद गर्म और सर्व होने से क्या मतलब. सत्य की सदा जीत होती है. यह भी वीरता का एक चिहून है. विजय वहीं होती है जहाँ पवित्रता और प्रेम है. दुनिया धर्म और अटल आध्यात्मिक नियमों पर खडी है. जो अपने आप को उन नियमों के साथ अभिन्न करके रहता है, उसी की विजय होती है. जब हम कभी वीरों का हाल सुनते हैं तब हमारे अन्दर भी वीरता की लहरें उठती हैं और वीरता का रंग चढ जाता है परन्तु प्रायः वह चिरस्थायी नहीं होता. इसका कारण यही है कि हम सबको केवल दिखाने के लिए वीर बनना चाहते हैं. टीन के बर्तन का स्वभाव छोडकर अपने जीवन के केन्द्र में निवास करो और सच्चाई की चट्टान पर दृढता से खडे हो जाओ. बाहर की सतह को छोडकर जीवन की तहों में घुसो तब नये रंग खिलेंगे.....


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