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Aman kumar

Children Stories Fantasy Others

4  

Aman kumar

Children Stories Fantasy Others

[जंगल]

[जंगल]

10 mins
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जंगल और जंगल के वन्यजीव रीडर अणिमा जोशी के मोबाइल पर फोन आ था मांडवी दीदी की बहू तविषा का. आवाज उसकी घबराई हुई- सी थी. कह रही थी, आंटी बहुत जरूरी काम है. जम्मा से बात करवा दें। अणिमा दीदी ने असमर्थता जताई- मांडवी दीदी कक्षा ले रही है. काम बता दें. उनके कक्षा से बाहर आते ही यह संदेश उन्हें दे देंगी, बल्कि अपने सामने ही मांडवी दीदी से उसकी बात करवा देंगी. वैसे हुआ क्या है? तविषा, इतनी घबराई हुई- सी क्यों है? घर में सब कुशल मंगल तो है? परेशानी का कारण बताने की बजाय तविषा ने उनसे पुनः आग्रह किया, आंटी, अम्मा से बात हो जाए तो. अणिमा जोशी को स्वयं उसे टालना बुरा लगा. उचित नहीं लगेगा, तविषा. अनुशासन भंग होगा. कक्षा का समय विद्यार्थियों के पढने का समय है. मुझे बताओ, तविषा. मुझे बताने में झिझक कैसी? नहीं आंटी, ऐसी बात नहीं हैं। तविषा का स्वर भर्रा- सा आया. तविषा ने बताया, घर में जो जुडवा खरगोश के बच्चे पाल रखे हैं उन्होंने, सोनू- मोनू, उनमें से सोनू नहीं रहा। साढे दस के करीब कामवाली कमला घर में झाडू- पोंछा करने आई तो बैठक बुहारते हुए उसकी नजर सोफे के नीचे सो रहे सोनू पर पडी. जगाने के लिए उसने सोनू को हिलाया, ताकि सोफे के नीचे वह ठीक से सफाई कर सके. उसके जगाने की सोनू पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. वह बुच्बुवाई कैसे घोडे बेचकर सो रहा है शैतान. अबकी उसने उसे लगभग झकझोरा, बल्कि उसकी टांग पकडकर उसे सोफे के नीचे से बाहर घसीट लिया. सोनू- मोनू की चौकडियां, छुष्पा- छुष्पावल, साफ- सफाई के काम में कम नही खिझाती उसे. घर में कौन पियूष कम बिखराहट करता था, जो इनकी कमी थी. मगर सोनू की देह में कोई हरकत नहीं हुई. उसे लगा था, बाहर खींचते ही वह उसकी पकड से छूट एकदम से दौड लेगा. कमला ने चीखकर तविषा को पुकारा, छोटी बीजीsss" तविषा अचेत सोनू को देख घबडा गई. उसने सोनू की पीठ- पेट को सहलाया- पुचकारा. उसने कान खींचकर छेडा. कान खींचना सोनू को बडा नागवार गुजरता था. अपनी रिस जाहिर करते हुए वह बडी देर तक उनसे दूर- दूर बना रहता था. पुचकारने पर भी गोदी में न आता था. मगर इस बार न सोनू ने अपनी रिस प्रकट की, न उससे दूर भागा. गोदी में उठाया तो उसकी रेशमी- सी देह हाथों में टूटी कोंपल- सी झूल गई.
उसकी समझ में नहीं आ रहा था, वह क्या करे? आस- पास जानवरों का कोई डॉक्टर है नाहीं. बीशून्य ब्लॉक की श्रेया ने अपने यहाँ कुल्ला पाल रखा है. इंटरकाम से उसने श्रेया से बात करनी चाही. संयोग से श्रेया घर पर नहीं है. नौकर को जानवरों के डॉक्टर के विषय में कोई जानकारी नहीं. वह नया ही उनके घर पर लगा है. अपनी समता से उसने बच्चों के डॉक्टर को घर बुलाकर सोनू को दिखाया. डॉक्टर ने देखते ही कह. प्राण नहीं अब सोनू में. हो सकता है, इसे किसी जहरीले कीडे ने काट लिया ही. बिल्ली तो नहीं आती घर में? नीचे Garden में घुमाने तो नहीं ले गए? आंटी, आप अम्मा को जल्दी से जल्दी घर भेज दें. घंटे भर में प्ले स्कूल से पियूष घर आ जाएगा. बहुत प्यार करता है वह सोनू- मोनू को. उसे समझाना संभालना मुश्किल हो जाएगा. मोनू भी भौचक- सा सोनू की निस्पंद पडी देह के इर्द- गिर्द मंडरा रहा है। मांडवी दी घर पहुंची तो बैठक में काली बदली ठिठकी सी तनी हुई थी. सोफों के बीच के खाली पडे फर्श पर सोनू निश्चेष्ट पडा हुआ था. झुकी तो पाया, आँख ठहरी हुई थी उसकी, मानो नींद मैं आँखे खुली रह गई हों. पियूष उसी के निकट गुमसुम बैठा हुआ था. मोनू सोनू की परिक्रमा- सा करता कभी दाएँ ठिठक उसे गौर से ताकने लगता, कभी बाएँ से. कभी मुँह उठाकर पियूष की ओर देखता. उससे पूछने की मुद्रा में- भैया, ये सोनू उठकर हमारे साथ खेलता क्यों नहीं? पियूष की स्तब्धता तोडना उन्हें जरूरी लगा. नन्हीं सी जिंदगी में वह मौत से पहली बार मिल रहा है. मौत उसकी समझ में नहीं आ रही है. ऐसा कभी हुआ नहीं कि उन्होंने घर की घंटी बजाई हो और तीनों लपककर दरवाजा खोलने न दौडे हों. खोल तो पियूष ही पाता था, मगर मुँह दरवाजे की और उठाए वे दोनों भी पियूष के नन्हे हाथों में अपने अगले पंजे लगा देते हों जैसे. पियूष का सिर उन्होंने अपनी छाती से लगा लिया. पियूष रोने लगा है" दादी, वादी! ये सोनू को क्या हो गया? दादी, सोनू बीमार है तो डॉक्टर को बुलाकर दिखाओ न दादी! मम्मी गंदी हैं ना बोलती हैं- सोनू मर गया. वह अपनी उमडी चली आ रही आँखों को भीतर- ही- भीतर घुटकते हुए, संधे स्वर को साचती हुई उसे समझाने लगती हैं, रोते नहीं, पियूष. सोनू को दुःख होगा. सोनू तुम्हें हमेशा हँसते देखना चाहता था न! इसीलिए तो तुम्हारे साथ खूब धमाचौकडी मचाता था. उसके पीछे तुम नीचे जाकर अपने हमजोलियों के संग खेलना भी भूल जाते थे। मोनू उनकी गोदी में मुँह सटाए उनके चेहरे को देख रहा है, बिटर- बिटर दृष्टि, आँसुओं से भरी हुई. जानवर भी रोते हैं. पहली बार उन्होंने किसी जानवर को रोते हुए देखा है. बचपन में गांव की काली चित्तेवाली गाय याद है. गाय की आँखों की कीच भर याद है. अम्मा बताती थी' बछडा जब नहीं रहा था चितकबरी का, अजीब तरीके से रंभा रंभाकर रोती थी. कलेजा मुँह को आ जाता था। अणिमा जोशी के मोबाइल से उन्होंने बेटे शैलेश को दफ्तर में खबर कर देना उचित समझा था. न जाने परेशान तविषा ने शैलेश को फोन किया हो, न किया हो. शैलेश ने कहा था, ऐसा करें, अम्मा, घर पहुंच रही हैं आप. नीचे सोसाइटी में चौकीदार को कह दें. काई तीन से पहले जमादारों का काम निपटता नहीं. एक को ऊपर भेज दें और सोनू को उठवाकर समाचार अपार्टमेंट्स से लगे नाले में फिंकवा दे. कुत्ते- बिल्ली सफाचट कर जाएंगे. गरमी में ज्यादा देर घर में रखने से बदबू आने लगेगी. पियूष वैसे भी बडी जल्दी बीमार पड जाता है. सावधानी बरतना जरूरी है, अम्मा। और अम्मा, बेहतर है यह काम पियूष के प्ले स्कूल से लौटने के पहले ही हो जाये. उसके कोमल मन मस्तिष्क पर बुरा असर पडेगा. बहुत सवाल करता है पियूष. जवाब देते नहीं बन पडेगा। उन्होंने शैलेश से स्पष्ट कह दिया था छुट्टी लेकर वह फौरन घर पहुँचे. उनके घर पहुँचने तक पियूष घर पहुंच चुका होगा. अपनी पडी पर निगाह डाल ले वह. नाले में वह सोनू को हरगिज नहीं फिंकवा सकतीं. पियूष सोनू को बहुत प्यार करता है. स्थिति से भागने की बजाय उसका सामना करना ही बेहतर है. सोनू को घर में न पाकर उसके अबोध मन के जिन सवालों से पूरे घर को टकराना होगा उसे संभालना कठिन होगा. जमावार को घर पहुँचते ही वे खबर कर देंगी. उनकी इच्छा है, घर के बच्चे की तरह सोनू का अंतिम संस्कार किया जाए. आस- पास ही कहीं जमावार से मिटूट्टी खुदवाकर उसे जमीन में गाड दिया जाए. बेटे शैलेश को उनकी बात सुसंगत लगी हो या न लगी हो, पर उसे मालूम है कि अम्मा से बहस एक सीमा तक ही खिंच सकती है. तब तो और नहीं, जब ये किसी बात को लेकर निर्णय ले चुकी होती है. पहुंचता हूँ। शैलेश ने कहा था. उन्होंने पियूष को समझा दिया था- तुम्हारे सोनू को जमीन में गाडने ले जा रहे हैं, तुम्हारे पापा. नन्हें बच्चों की मौत होती है तो उन्हें जमीन में गाड दिया जाता है, ताकि बच्चा कहीं और जन्म ले सके. न न, जमीन से बच्चा पेड की भाँति नहीं उगता पगले. वहाँ से किसी माँ के पेट में पहुँच जाता है. नौ महीने उस माँ के पेट में रहता है और फिर दूसरे बच्चे के रूप में जन्म ले लेता है. तुम मोनू के पास ही रहो. तुम्हें मोनू को संभालना है. पापा के साथ जाने की जिद न करो। मेरा जन्म भी ऐसे ही हुआ? शायद! वादी, पर सोनू मर क्यों गया?
सवाल के जवाब देने ही होंगे" उसके दिल में गहरा दुःख था. पियुष। वादी, उसके दिल में दुःख क्यो था? उसे अपने माँ- बाप से अलग जो कर दिया गया। किसने किया, दादी? उस दुकानदार ने, जिससे हम उसे खरीदकर लाए थे. दुकानदार पशु- पक्षियों को बेचता है न! उसने कुछ लोगों से कह रखा है, वे जंगल में घात लगाकर चूमें. मौका मिलते ही ननों पशु- पक्षियों को अपने जाल में फैसा ले. उन्हें शहर लाकर उसे बेच दें. तुम्हीं बताओं, मी- बाप से दूर होकर बच्चे दुःखी होते हैं कि नहीं? होते हैं, दादी. मम्मी, चार दिन के लिए मुझे छोडकर नानू के पास मुंबई गई थीं तो मुझे भी बहुत दुःख हुआ था। तविषा और शैलेश के संग महरौली शैलेश के मित्र के बच्चे के जन्मदिन पर गया था पियूष! उन लोगों ने बंगले के पिछले हिस्से में पशु- पक्षियों का छोटा- सा सुंदर बगीचा बना रखा था. मंझोले नीम के पेड की डाल पर तोते का पिंजरा लटका रखा था. जालीदार बडे से बांकडे में उन्होंने खरगोश पाल रखे थे. एक अन्य जालीदार बांकडे में किस्म किस्म की रंग- बिरंगी फुदकती चिडियाँ और नन्हें से पोखर में कछुए. पियूष को खरगोश और तोता इतने भाए कि घर आकर उसने जिद पकड ली- उसे भी घर में खरगोश और तोता चााहिए. तविषा और शैलेश ने बहुत समझाया फ्लैट में पशु- पक्षी पालना कठिन है. कहाँ रखेंगे उन्हें? बालकनी में। पियूष ने जगह ढूँढ ली. तविषा ने उसकी बात काट उसे बहलाना चाहा- पूरे दिन खरगोश बांकडे में नहीं बंद रह सकते. उन्हें कुछ समय के लिए खुला छोडना होगा. छोटे- से घर में वे भागा- दौडी करेंगे. उनकी देखभाल कौन करेगा? दादी करेंगी। दादी पढाने Collage जाएंगी तो उनके पीछे कौन करेगा? स्कूल से आकर मैं कर लूंगा। सारा घर हँस पडा. सब लोग तब और चकित रह गए जब पियवादी को पटाने की कोशिश की कि बादी उसके जन्मदिन पर कोई- न- कोई उपहार देली ती है. क्यों न इस बार वे उसे खरगोश और तोता लाकर वे दें. वादी हंसी. जन्मदिन तो पियूष का आकर चला गया. अब जब आएगा, तब देखा जाएगा. लेकिन पियूष पर किसी के तर्क का कोई असर नहीं हुआ. उसका हठ न टला तो न हला. निरुत्तर दावी उसे लेकर लाजपत नगर चिडियों की दुकान पर गई. तोता और खरगोश में से उन्होंने पियूष को कोई एक चीज चुनने के लिए कहा. पियूष ने खरगोश का जोडा पसंद किया. तत्काल उनका नामकरण भी कर दिया- सोनू मोनू! सोनू- मोनू के साथ उनका घर भी खरीदा गया- जालीवार बडा- सा बांकडा. उस सांझ सोसाइटी के उसके सारे हमजोली चडी देर तक बॉलकनी में डटे सखरगोशों को देखते- सराहते रहे और पियूष के भाग्य से ईर्ष्या करते रहे. दूसरे रोज भी मोनू सामान्य नहीं हो पाया. पियूष को भी यात्री ने प्ले स्कूल भेजना मुनासिब न समझा. पियूष पर में रहेगा तो दोनों एक- दूसरे को देख ढांढस महसूस करेंगे. उन्होंने स्वयं भी Collage जाना स्थगित कर दिया. सुबह मोनू ने दूथ के कटोरे को छुआ तक नहीं. बगल में रखे सोनू के खाली दूथ के कटोरे को रह- रह कर सूथता रहा. बांकडे का दरवाजा खोलते ही यह बैठक में ठीक उसी स्थान पर आकर फर्श सूंघता हुआ मंडराने लगा, जिस स्थान पर उसने सोनू को निस्पंद पडा हुआ देखा था. उन्हें मोनू की चिंता होने लगी. पियूष ने तो फिर भी दादी के मनाने पर कुछ खा- पी लिया. तविषा अपराय- बोध से भरी हुई थी. मांडवी दी से उसने अपना संशय बाँटा. चावल की टंकी में धुन हो रहे थे. उस सुबह उसने घुन मारने के लिए डाबर की पारे की गोलियों की शीशी खोली थी चावलों में डालने के लिए. शीशी का ढक्कन मरोडकर जैसे ही उसने ढक्कन खोलना चाहा, कुछ गोलियों छिटककर दूर जा गिरी. गोलियाँ बटोर उसने टंकी में डाल दी थी. फिर भी उसे शक है कि एकाध गोली ओने- कोने में छूट गई होंगी और. दादी. हाँ, पियूष! दादी. मोनू मेरे साथ खेलता क्यों नहीं? बेटा, सोनू जो उससे बिछुड गया है. वह दुःखी है. दोनों को एक- दूसरे के साथ रहने की आदत पड गई थी न! मुझे भी तो सोनू के जाने का दुःख है. दादी, क्या हम दोनों भी मर जाएंगे?
मांडीवी ने तहपकर पियुष के मुँह पर हाथ रख दिया. डाँटा ऐरी अपनी बोलक्यों बोल रहा है? विपूष ने प्रतिवाद किया, आपने ही तो कहा था, दावी, सीनू दुःख से मर गया। कहा था. उसे अपने माँ- बाप से बिछुडने का दुःख था. जंगल उसका पर है. जंगल में उसके मी बाप है. तुम तो अपने माँ- बाप के पास हो। दादी, हम मोनू को उसके माँ- बाप से अलग रखेंगे तो वह भी मर जाएगा दुःख से? मांडवी दी निरुत्तर हो आई. दादी, हम मोनू को जंगल में ले जाकर छोड दें तो वह अपने मम्मी- पापा के पास पहुंच जाएगा. फिर तो वह मरेगा नहीं न? नहीं मरेगा. पर तू मोनू के बिना रह लेगा न? मांडवी दी का कंठ भर आया. रह लूँगा। ठीक है. शैलेश से कहूंगी कि वह रात को गाडी निकाले और हमें जंगल ले चले. रात में ही खरगोश दिखाई पडते हैं. शायद मोनू के माँ- बाप भी हमें दिखाई पड जाएंगे।


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