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Sugan Godha

Tragedy


4.8  

Sugan Godha

Tragedy


"सभ्य इंसान "

"सभ्य इंसान "

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विमला ताई और भुवनेश ताउ का इकलौता बेटा आकाश डॉक्टर बनने के बाद शहर में ही रहने लगा, उसने अपने साथ पढ़ने वाली लड़की रितु से शादी कर ली दोनों एक ही अस्पताल में काम करते हैं। काम की वजह से गांव से जैसे नाता ही टूट गया माँ बाप की खोज खबर लेने भी नहीं आते, ज्यादा ही कुछ हो जाये तो फोन पर ही बात कर लेता है, लेकिन इस बार भुवनेश ताउ बहुत बीमार हो गए बेटे बहु और पोते की राह ताकते - ताकते बूढ़ी आंखे थक कर बंद हो गयी, तब जाकर आकाश गांव आया अंतिम संस्कार के बाद चौथा कर वापस जाने लगे तो गांव के लोगों ने कहा अब तो अम्मा को साथ ले जाओगे या यहीं रहेगी अकेली, आकाश आज्ञाकारी बेटे की तरह गर्व से माँ को साथ ले तो गया लेकिन ज्यादा दिन बूढ़ी माँ का बोझ उस बेचारे से उठाया न गया, रितु भी आये दिन किसी न किसी बात पर सास को सुना ही देती थी।

पढ़े-लिखे सभ्य लोग होने के नाते घर में पार्टी रखना उनकी अहम जिम्मेदारी थी, लेकिन गांव से आयी अनपढ़ माँ जब इन सभ्य लोगों के सामने जाएगी तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी आकाश की। 

कुछ ही दिन बाद आकाश के जन्मदिन के मौके पर घर में पार्टी रखी गयी, रितु ने आकाश से कहा तुम माँ को समझा देना बाहर ना आये, हाँ हाँ समझा दूँगा तुम जल्दी तैयार हो कर विवेक को तैयार करो,

कुछ ही देर में मेहमान आने लगे जोर-शोर से जश्न शुरु हुआ, माँ से अंदर रहा न गया तो खिड़की से झाँक कर देखने लगी रितु की सहेली वृंदा की नजर उन पर पड़ी, अरे रितु वो कौन है रितु झट से बोली हमारी नौकरानी हैं तुम चलो पार्टी इंजॉय करो... 

कुछ ही देर में सब चले गए और आकाश और रितु माँ को सभ्यता सिखाने लगते है, दादी का अपमान 7 साल के विवेक से देखा न गया तो बिचारा रोने लगा मम्मा दादी को मत डांटो बच्चे के सामने अपनी सभ्यता खोना ठीक न समझा और दोनों अपने कमरे में चले जाते हैं । 

विवेक दादी के साथ अपने कमरे में चला जाता है और दादी से कहता है, आप यहां क्यूँ आयी आप वापस चले जाओ, ताई उसे सीने से लगा लेती हैं और चुपचाप आँसू बहाती हैं। 

उधर रितु, देखा आकाश तुमने माँ कैसे हमारे बच्चे के मन में जहर भर रहीं हैं ऐसे ही चलता रहा तो हमारा बच्चा हमारी बिल्कुल इज़्ज़त नहीं करेगा, 

तुम माँ को वृद्धाश्रम छोड़ दो वहां अच्छे से रहेगी और हमारी टेंशन भी खत्म, ठीक है तुम सही कह रहीं हो कल ही छोड़ आता हूँ ...

अगले दिन बहाने से माँ को आश्रम छोड़ आया काफी समय तक इंतजार के बाद भी आकाश नहीं आया तो अपने बेटे को ढूंढने निकल पड़ी और रास्ता भटक गयी। 

ताई दर - दर की ठोकरें खाने लगी खुद को इतना असहाय महसूस कर वो अपना मानसिक संतुलन खोने लगी किसी भी बच्चे को विवेक समझ लेती और लोग उसे पागल समझ भगा देते तो कोई पत्थर भी मार देता। 

एक दिन तो गाड़ी से जा टकराई और वही गिर गयी डॉ. वृंदा गाड़ी से उतर कर देखती हैं तो उसे याद आता है , अरे ! ये तो रितु की कामवाली है। वृंदा उसे अस्पताल ले जाती हैं, जब विमला ताई को होश आता है तो वृंदा को अपनी आप बीती सुनाती हैं। वृंदा हार्ट स्पेशलिस्ट होने के कारण ही शायद ताई के दर्द को महसूस कर लेती है। अगले ही दिन वृंदा अपने घर पार्टी रखती हैं आकाश और रितु को भी बुलाती है सब लोग आ जाते है और वृंदा से अचानक पार्टी का कारण पूछते हैं, तब वृंदा कहती है मैं बहुत छोटी थी तब माँ छोड़ कर चली गई थी, और आज भगवान ने मुझे मेरी माँ को लौटा दिया इसलिए मेरे लिए बहुत खुशी का दिन है। 

रितु आश्चर्य से पूछती है ये कैसे हो सकता है तुम्हारी माँ को मरे तो कितने साल हो गए फिर कौन सी माँ !! वृंदा मुस्कराते हुए बोली अरे ! रुको तो सही अभी पता चल जाएगा माँ....माँ..... जल्दी आओ सब राह देख रहे हैं वृंदा की माँ को देख आकाश और रितु के होश उड़ जाते हैं, वृंदा व्यंगात्मक भाव से बोली क्यूँ रितु मेरी माँ तुम सभ्य लोगों के बीच खड़े रहने लायक हैं न या फिर तुम इनके साथ खड़े रहने लायक नहीं हो शर्म आनी चाहिए उन लोगों को जो अपने माँ बाप को नौकर बना कर लोगों के सामने पेश करते हैं ये भूल कर की आज वो जो कुछ भी है सिर्फ अपने माता-पिता की मेहनत के कारण ही हैI शर्म के मारे आज आकाश अपनी माँ से नजर मिलने लायक न रहा और अंदर ही अंदर खुद को कोसता है। 



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